युवराज मेहता मौत मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने NDRF, SDRF और नोएडा प्राधिकरण के जवाबों पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने आपदा प्रबंधन और एजेंसियों के तालमेल पर ठोस योजना मांगी है।

युवराज केस पर हाईकोर्ट सख्त
Prayagraj: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा के सेक्टर 150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने नोएडा प्राधिकरण, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के जवाबों पर असंतोष जताया है। कोर्ट ने साफ कहा कि अब तक जो व्यवस्था चल रही है, वह स्वीकार्य नहीं है और सभी संबंधित एजेंसियों से विस्तृत जवाब मांगा है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने बहुमंजिला इमारतों की सुरक्षा और आपदा प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, स्थानीय प्रशासन और पुलिस के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई में सभी एजेंसियां मिलकर एक ठोस और संयुक्त कार्ययोजना पेश करें, जिससे आपदा के समय त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
हाईकोर्ट ने विभागों के बीच तालमेल की कमी को लेकर भी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि अक्सर देखा जाता है कि एक विभाग दूसरे को फोन करता रहता है, लेकिन समय पर प्रतिक्रिया नहीं मिलती। इस तरह का कम्युनिकेशन गैप आपदा के समय जानलेवा साबित हो सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस खामी को हर हाल में दूर करना होगा।
कोर्ट ने नोएडा प्राधिकरण से सवाल करते हुए कहा कि क्या उसका काम सिर्फ बिल्डरों को अनुमति देना है या सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उसकी जिम्मेदारी है। कोर्ट ने पूछा कि जब 40-40 मंजिला इमारतों को मंजूरी दी जा रही है, तो क्या यह जांचा जाता है कि आपदा के समय वहां पहुंचने के लिए जरूरी उपकरण और संसाधन मौजूद हैं या नहीं।
हाईकोर्ट ने यह भी पूछा कि अगर बिल्डरों के पास पर्याप्त उपकरण नहीं हैं और प्राधिकरण शुल्क ले रहा है, तो आपदा के समय बचाव कार्य कौन करेगा। कोर्ट ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई में एक विस्तृत योजना प्रस्तुत की जाए, जिसमें स्पष्ट हो कि किस स्थिति में कौन सी एजेंसी जिम्मेदारी निभाएगी।
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कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि आखिर किन कारणों से युवराज मेहता को समय पर बचाया नहीं जा सका। कोर्ट ने पूछा कि बचाव दल को इस तरह की घटनाओं से निपटने के लिए क्या प्रशिक्षण दिया गया है और घटना के समय कौन-कौन अधिकारी मौके पर मौजूद थे।