शहनाई के जादूगर उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की विरासत पर दीमक का वार, पहचान खो रहे राष्ट्रीय सम्मान

काशी में भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के पुश्तैनी घर में रखीं अनमोल यादें और राष्ट्रीय सम्मान देखरेख के अभाव में दीमक और नमी की भेंट चढ़ रहे हैं।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 21 August 2026, 12:23 PM IST

Varanasi: जिस शहनाई की आवाज ने उस्ताद बिस्मिल्लाह खान को दुनिया भर में पहचान दिलाई, वह अब एक ऐसी विरासत का हिस्सा है जो इस महान कलाकार की यादगार चीज़ों में झलकती है और जो सही देखभाल न होने की वजह से बर्बाद होने के कगार पर है। काशी में उनके पुश्तैनी घर में रखे पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे राष्ट्रीय सम्मान खराब हो रहे हैं; नमी और दीमक ने इन अनमोल यादगार चीज़ों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया है।

घर में रखे सम्मान अब पहचान में भी नहीं आते

उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की बेटी ज़रीना बेगम के अनुसार, उनके पिता को मिले कई बड़े सम्मान लंबे समय से अनदेखी के कारण खराब हो रहे हैं। पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे पुरस्कारों में दीमक लग गई है। हालत यह है कि इनमें से कुछ सम्मान तो अब अपनी असली शक्ल में भी नहीं रहे। ये पुरस्कार सिर्फ परिवार की धरोहर नहीं हैं; ये देश के संगीत इतिहास से जुड़ी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक चीजें हैं।

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हर चीज झेल रही है मौसम की मार

उस्ताद की शहनाई, शेरवानी, टोपी, तस्वीरें, पंखा, अलमारी, ताड़ के पत्ते का पंखा और खाने के बर्तन जैसी कई चीजें उनके पुश्तैनी घर में रखी हैं। भारत और विदेशों में उनके परफॉर्मेंस के दौरान ली गई तस्वीरें भी यहीं रखी हैं। मानसून के मौसम में घर के अंदर बढ़ती नमी इन चीजों के लिए एक बड़ी समस्या बन गई है। जिस कमरे में उस्ताद ने अपनी जिंदगी का ज्यादातर समय बिताया और जिसमें बहुत सारी यादें जुड़ी हैं वह कमरा भी अब जर्जर हालत में है।

उस्ताद की विरासत पुरस्कारों से कहीं आगे

उस्ताद को मिले सम्मान सिर्फ पद्म पुरस्कारों तक ही सीमित नहीं हैं। उनके घर में कई अन्य प्रतिष्ठित सम्मान भी रखे हैं, जिनमें संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप, राजीव गांधी सद्भावना पुरस्कार और स्वाति संगीत पुरस्कार शामिल हैं। इन पुरस्कारों से जुड़ी चीजें उस्ताद की जिंदगी और संगीत के प्रति उनके दशकों लंबे समर्पण की कहानी बताती हैं। इनका नष्ट होना सिर्फ पुरानी चीजों के नुकसान से कहीं ज्यादा होगा; यह भारतीय संगीत के इतिहास के एक हिस्से को खोने जैसा होगा।

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म्यूजियम बनाने की योजना हुई है अटकी

शुरुआत में उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के पुश्तैनी घर को म्यूज़ियम में बदलने का प्रस्ताव था। हालांकि, परिवार के सदस्यों के बीच जरूरी तालमेल न होने के कारण यह पहल आगे नहीं बढ़ सकी। अलग-अलग राय और पारिवारिक मतभेदों के कारण उनकी विरासत को एक जगह सहेजने की कोशिशें रुकी रहीं। अब परिवार की ओर से इस दिशा में फिर से कोशिशें करने की बात हो रही है।

सम्मानों को सुरक्षित रखने के लिए सरकार से अपील

जरीना बेगम का कहना है कि परिवार तालमेल बिठाने और उस्ताद से जुड़ी यादगार चीज़ों को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहा है। इसके अलावा वे उनके क्षतिग्रस्त पद्म सम्मानों की मरम्मत के लिए सरकार से मदद लेने की योजना बना रहे हैं। उस्ताद बिस्मिल्लाह खान शहनाई को सिर्फ एक वाद्य यंत्र नहीं मानते थे; उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत की दुनिया में इसे एक खास मुकाम दिलाया। इसे देखते हुए उनकी विरासत की अनदेखी मौजूदा संरक्षण व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।

Location :  Varanasi

Published :  21 August 2026, 12:23 PM IST