गौना भी नहीं आया था, उजड़ गई मांग: गुजरात हादसे में जान गंवाने वाले 5 मजदूरों के शव घर पहुंचते ही पसरा मातम

गुजरात के भुज में हुए भीषण सड़क हादसे में सीतापुर जिले के रामपुर मथुरा क्षेत्र के पांच गरीब मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई। रविवार को जब पांचों के शव उनके पैतृक गांव पहुंचे, तो परिजनों की चीख-पुकार से पूरा माहौल गमगीन हो गया। इन मौतों से परिवारों के सामने रोजी-रोटी और बच्चों के पालन-पोषण का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

Post Published By: Priyam Kashyap
Updated : 11 October 2026, 6:14 PM IST
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Sitapur: गुजरात के भुज में दो दिन पहले हुए सड़क हादसे ने सीतापुर जिले के रामपुर मथुरा क्षेत्र के पांच परिवारों को ऐसा जख्म दिया है, जिसकी भरपाई शायद ही कभी हो सके। परिवार का पेट पालने और बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर परदेस गए पांच मजदूरों की मौत से गांवों में मातम पसरा है। रविवार को मृतकों के शव गांव पहुंचे तो स्वजन की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया। अंतिम दर्शन के बाद नम आंखों के बीच सभी का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

पांच परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट

हादसे में जान गंवाने वाले सभी मजदूर सीमित संसाधनों वाले परिवारों से ताल्लुक रखते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। ऐसे में घर-परिवार की जिम्मेदारी उठाने के लिए वे गुजरात में मजदूरी कर रहे थे। उनकी मौत से परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। किसी की पत्नी और छोटे बच्चे पीछे छूट गए तो किसी के परिवार का एकमात्र सहारा छिन गया। कई बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया और परिवारों के भविष्य पर संकट मंडराने लगा है।

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पांच महीने पहले हुई थी कुलदीप की शादी

बिंद्रापुरवा मजरा खनेवा मिठौरा निवासी कुलदीप (26) की शादी पांच महीने पहले ही हुई थी। अभी पत्नी का गौना भी नहीं आया था कि हादसे ने उसकी जिंदगी उजाड़ दी। तीन बीघा जमीन वाले परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। कुलदीप करीब 10 साल से गुजरात में मजदूरी कर रहा था। हादसे से एक दिन पहले ही उसकी स्वजन से फोन पर बात हुई थी। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह उसकी आखिरी बातचीत साबित होगी।

तीन बच्चों के सिर से उठा संदीप का साया

इसी गांव के संदीप (33) भी दो महीने पहले पहली बार कमाने के लिए गुजरात गए थे। उनकी पत्नी रेनू देवी और तीन बच्चे हैं। इनमें 16 वर्षीय सचिन, सात वर्षीय हंसमुख और 10 महीने का मासूम शामिल है। संदीप अपने परिवार के लिए पक्का मकान बनवाने का सपना देखते थे, लेकिन उनकी मौत से परिवार का सहारा छिन गया और बच्चों के बेहतर भविष्य की उम्मीद अधूरी रह गई।

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देशराज की मौत से परिवार बेसहारा

खनेवा निवासी देशराज (40) अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। उनकी मौत से पत्नी माधुरी और तीन बच्चों के सामने जीवनयापन का संकट खड़ा हो गया है। परिवार की जिम्मेदारी उठाने वाले देशराज की असमय मौत ने स्वजन को गहरे सदमे में डाल दिया है।

अमित की मौत से बेटी के सिर से उठा पिता का साया

धौरहरा के पासिन पुरवा निवासी वीरश (22) की शादी एक साल पहले हुई थी। हादसे में अमित कुमार (26) की भी जान चली गई। वह एक बेटी के पिता थे। उनकी मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और पत्नी व बेटी के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।

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हादसे में जान गंवाने वाले पांचों मजदूरों के परिवार पहले से ही सीमित आय और संसाधनों के सहारे जीवन गुजार रहे थे। परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए परदेस गए इन मजदूरों की मौत ने न केवल उनके अपनों को गहरे दुख में डुबो दिया बल्कि उनके सामने रोजी-रोटी और बच्चों के पालन-पोषण की गंभीर चुनौती भी खड़ी कर दी है।

Location :  Sitapur

Published :  11 October 2026, 6:14 PM IST

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