
यूपी में पावर प्लांट बंद होने से बढ़ा बिजली संकट (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
Lucknow: भीषण गर्मी के बीच उत्तर प्रदेश में बिजली संकट लगातार गहराता जा रहा है। राज्य के कई हिस्सों में अघोषित बिजली कटौती से लोग परेशान हैं। इस संकट के पीछे एक बड़ी वजह मई महीने में कई पावर प्लांटों का बंद रहना माना जा रहा है। पावर कॉरपोरेशन ने जिन बिजली संयंत्रों से बिजली खरीद का करार किया है, उनमें से करीब एक दर्जन प्लांट कुछ दिनों तक बंद रहे। इससे राज्य को पर्याप्त बिजली नहीं मिल सकी और मांग के मुकाबले आपूर्ति प्रभावित हुई।
22 मई को उत्तर प्रदेश में एक दिन में अब तक की सबसे अधिक 669 मिलियन यूनिट बिजली आपूर्ति की गई। भीषण गर्मी के कारण बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे समय में कई उत्पादन इकाइयों के बंद रहने से बिजली व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ा। जानकारों का कहना है कि यदि सभी पावर प्लांट चालू रहते तो बिजली की उपलब्धता और अधिक होती तथा कटौती की स्थिति कम बनती।
मई महीने में 660 मेगावॉट क्षमता वाला घाटमपुर पावर प्लांट 18 दिनों तक बंद रहा। इसके अलावा ललितपुर का 660 मेगावॉट प्लांट 11 दिनों तक बंद रहा। जेएसडब्ल्यू महानदी (केएसके) का 1000 मेगावॉट उत्पादन 10 दिनों तक प्रभावित रहा। ओबरा-बी, ओबरा-सी, अनपरा-डी और जवाहरपुर जैसे बड़े संयंत्र भी कई दिनों तक बंद रहे।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने बिजली संकट के लिए कुप्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया है। परिषद के अध्यक्ष ने कहा कि बिजली उत्पादन इकाइयों के रखरखाव, कोयला प्रबंधन और सिस्टम क्षमता विस्तार में लापरवाही की वजह से प्रदेश की जनता को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
उन्होंने कहा कि कई पावर प्लांटों के लंबे समय तक बंद रहने से हजारों मेगावॉट बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ। इसका सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों की बिजली आपूर्ति पर पड़ा, जहां अघोषित कटौती बढ़ गई। परिषद का कहना है कि यदि समय रहते उत्पादन इकाइयों का रखरखाव और संसाधनों का प्रबंधन बेहतर किया जाता तो यह स्थिति नहीं बनती।
उपभोक्ता परिषद ने बंद पड़ी सभी उत्पादन इकाइयों को तत्काल चालू करने की मांग की है ताकि गर्मी के मौसम में लोगों को राहत मिल सके।
| पावर प्लांट | क्षमता | बंद रहने की अवधि |
|---|---|---|
| घाटमपुर | 660 मेगावॉट | 18 दिन |
| ललितपुर | 660 मेगावॉट | 11 दिन |
| जेएसडब्ल्यू महानदी (केएसके) | 1000 मेगावॉट | 10 दिन |
| ओबरा-बी | 200 मेगावॉट | 9.5 दिन |
| ओबरा-सी | 660 मेगावॉट | 8 दिन |
| अनपरा-डी | 500 मेगावॉट | 6.5 दिन |
| जवाहरपुर | 660 मेगावॉट | 4 दिन |
| अनपरा | 210 मेगावॉट | 4 दिन |
| लैको | 600 मेगावॉट | 3 दिन |
| पारिछा | 250 मेगावॉट | 3 दिन |
| खुर्जा | 660 मेगावॉट | 1 दिन |
बिजली संकट के बीच राज्य की वितरण व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। प्रदेश में लगभग 3 करोड़ 73 लाख बिजली उपभोक्ता हैं। इन उपभोक्ताओं ने कुल 8 करोड़ 57 लाख किलोवॉट से अधिक का संयोजित भार लिया हुआ है। इसके मुकाबले 132 केवी उपकेंद्रों की कुल क्षमता केवल 6 करोड़ 25 लाख 76 हजार किलोवॉट बताई जा रही है।
ऐसे में यदि उपभोक्ता अपने स्वीकृत भार के बराबर भी बिजली उपयोग करें तो मौजूदा सिस्टम उस मांग को पूरा करने में सक्षम नहीं दिखाई देता। यही कारण है कि बढ़ती गर्मी के साथ प्रदेश में बिजली संकट और गहराता जा रहा है।
Location : Lucknow
Published : 25 May 2026, 9:32 AM IST
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