
प्रतीकात्मक तस्वीर (Img: Google)
Lucknow: उत्तर प्रदेश में लंबे समय से अटके त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर आखिरकार एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने पिछड़े वर्ग (OBC) के आरक्षण से जुड़ी बाधा को दूर करने के लिए “समर्पित राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग” का गठन कर दिया है। इस फैसले के बाद चुनाव प्रक्रिया को लेकर हलचल तेज हो गई है, लेकिन वोटिंग की तारीख अभी भी रहस्य बनी हुई है।
प्रमुख सचिव पंचायती राज की ओर से जारी अधिसूचना के बाद अब चुनावी तैयारियों को नई दिशा मिलती दिख रही है। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या अब पंचायत चुनाव तय समय पर हो पाएंगे या फिर अभी भी इंतजार लंबा रहेगा?
सरकार द्वारा गठित यह नया आयोग पांच सदस्यों की टीम के साथ काम करेगा, जिसका मुख्यालय लखनऊ में बनाया गया है। आयोग की जिम्मेदारी पूरे राज्य में सर्वे कर ओबीसी आरक्षण का वास्तविक आंकड़ा तैयार करना है। इस आयोग की कमान इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस राम औतार सिंह को सौंपी गई है। उनके साथ चार वरिष्ठ रिटायर्ड अधिकारी भी शामिल किए गए हैं, जो आरक्षण से जुड़े तकनीकी और कानूनी पहलुओं पर काम करेंगे।
यह टीम अब जमीनी स्तर पर डेटा जुटाकर यह तय करेगी कि किस क्षेत्र में OBC आरक्षण किस अनुपात में लागू होगा।
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सरकार के अनुसार, पहले से मौजूद OBC आयोग का कार्यकाल तो बढ़ा दिया गया था, लेकिन वह कानूनी रूप से “समर्पित आयोग” की श्रेणी में नहीं आता था। इसी वजह से पंचायत चुनाव के लिए जरूरी आरक्षण सर्वे शुरू नहीं हो पा रहा था। नियमों के मुताबिक, आरक्षण से जुड़ा सर्वे केवल निर्धारित मूल कार्यकाल के भीतर ही मान्य होता है। इसी कानूनी जटिलता के कारण पंचायत चुनाव की प्रक्रिया लगातार अटकी हुई थी। अब नया आयोग बनाकर सरकार ने इस कानूनी बाधा को दूर करने का दावा किया है।
नए आयोग के गठन के बाद अब पूरे उत्तर प्रदेश में तेजी से सर्वे किया जाएगा। इस सर्वे में यह पता लगाया जाएगा कि विभिन्न जिलों और पंचायत क्षेत्रों में OBC आबादी का वास्तविक अनुपात क्या है। इसी डेटा के आधार पर पंचायत सीटों पर आरक्षण तय किया जाएगा। फिलहाल राज्य में 27 प्रतिशत OBC आरक्षण का प्रावधान है, लेकिन इसे किस सीट पर लागू करना है, यह आयोग की रिपोर्ट तय करेगी। सरकार का मानना है कि पारदर्शी और कानूनी रूप से मजबूत डेटा के बिना चुनाव कराना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
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पंचायत चुनाव आमतौर पर समय पर होने चाहिए थे, लेकिन आरक्षण प्रक्रिया में देरी के कारण यह टल गए। अब आयोग के गठन के बाद प्रक्रिया फिर से शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि सर्वे, रिपोर्ट और अंतिम आरक्षण सूची तैयार होने में करीब 5 से 7 महीने का समय लग सकता है। इसके बाद ही राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव की आधिकारिक तारीखों की घोषणा करेगा। इसी आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि पंचायत चुनाव अक्टूबर-नवंबर 2026 के आसपास कराए जा सकते हैं।
हालांकि सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है, जिससे सस्पेंस और बढ़ गया है।
जैसे ही आयोग के गठन की खबर सामने आई, ग्रामीण इलाकों में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। संभावित उम्मीदवार अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय हो गए हैं, लेकिन स्पष्ट तारीख न होने के कारण असमंजस भी बना हुआ है। कई लोग इसे चुनाव से पहले का “पॉलिटिकल ट्रेलर” बता रहे हैं, जहां असली कहानी अभी शुरू होना बाकी है।
Location : Lucknow
Published : 21 May 2026, 4:12 PM IST
Topics : Indian politics OBC Reservation State Backward Class Commission UP Panchayat elections UP News