यूपी पंचायत चुनाव पर संकट! ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ेगा या हटेगा? सरकार के दो प्रस्तावों पर मंथन तेज

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव तय समय पर होने पर संशय गहरा गया है। सरकार के सामने ग्राम प्रधानों, ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल बढ़ाने या प्रशासक नियुक्त करने का विकल्प है। ओबीसी आयोग, मतदाता सूची और कोर्ट केस से देरी के संकेत बढ़े।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 20 May 2026, 10:23 AM IST

Lucknow: यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर बड़ी प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। संकेत मिल रहे हैं कि पंचायत चुनाव तय समय पर कराना संभव नहीं हो पाएगा। इसी बीच पंचायती राज विभाग की ओर से सरकार को दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव भेजे गए हैं, जिन पर अंतिम निर्णय होना बाकी है। इन प्रस्तावों के सामने आने के बाद राज्य में पंचायत राजनीति एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है।

दो प्रस्तावों पर टिकी है सरकार की रणनीति

पंचायती राज मंत्री Om Prakash Rajbhar ने बताया कि विभाग की ओर से शासन को दो विकल्प भेजे गए हैं। पहला प्रस्ताव ग्राम प्रधानों, ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल बढ़ाने का है। दूसरा प्रस्ताव उनके स्थान पर प्रशासक नियुक्त करने का है।

सरकार इन दोनों में से किसी एक विकल्प को मंजूरी दे सकती है। मंजूरी के बाद ही पंचायतों के संचालन को लेकर आगे की व्यवस्था तय होगी। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि किस प्रस्ताव को प्राथमिकता मिलेगी, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर मंथन जारी है।

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कार्यकाल समाप्त होने की स्थिति और प्रशासनिक विकल्प

जानकारी के अनुसार, ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है। नियमानुसार कार्यकाल खत्म होने के बाद पंचायतों के संचालन के लिए दो प्रमुख व्यवस्थाएं अपनाई जा सकती हैं।

पहली व्यवस्था में प्रशासक समिति बनाई जा सकती है, जिसमें ग्राम प्रधान और पंचायत सदस्य शामिल होकर प्रशासनिक कार्यों को जारी रखते हैं। दूसरी व्यवस्था में सीधे प्रशासक नियुक्त कर दिए जाते हैं, जो पंचायतों का संचालन संभालते हैं।

सूत्रों के मुताबिक सरकार की झुकाव फिलहाल प्रशासक समिति के विकल्प की ओर माना जा रहा है, जिससे मौजूदा प्रतिनिधियों का कुछ स्तर पर कार्यकाल बढ़ाया जा सके।

ओबीसी आयोग के गठन से बढ़ी प्रक्रिया की जटिलता

सरकार ने हाल ही में समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी दी है। यह आयोग सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों का आकलन करेगा और उसी आधार पर आरक्षण की स्थिति तय करेगा।

इस प्रक्रिया में सर्वेक्षण, अध्ययन और रिपोर्ट तैयार करने में कई महीने लग सकते हैं। इसी कारण पंचायत चुनाव की समयसीमा आगे खिसकने की संभावना और मजबूत हो गई है। आरक्षण व्यवस्था स्पष्ट होने के बाद ही चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाना आसान होगा।

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मतदाता सूची और जातीय जनगणना भी बनी बाधा

राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची के प्रकाशन की तिथि पांचवीं बार बढ़ाकर 10 जून कर दी है। इसके साथ ही प्रदेश में जातीय जनगणना की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। इन दोनों प्रक्रियाओं के चलते प्रशासनिक कामकाज पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है। ऐसे में पंचायत चुनाव को तय समय पर कराना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

पंचायत चुनाव से जुड़ा एक मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है। इस कारण भी अंतिम निर्णय अदालत के आदेश और सरकार के रुख पर निर्भर करेगा। जब तक अदालत का फैसला स्पष्ट नहीं होता, तब तक चुनाव की स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी।

Location :  Lucknow

Published :  20 May 2026, 10:23 AM IST