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इनकम टैक्स विभाग ने बुधवार सुबह बहुजन समाज पार्टी (BSP) के विधायक उमाशंकर सिंह के लखनऊ स्थित आवास पर छापेमारी की। इस कार्रवाई के बाद प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है। अगले वर्ष Uttar Pradesh में विधानसभा चुनाव होने हैं।
बसपा विधायक उमा शंकर सिंह के घर पड़ा छा
Lucknow: बसपा के विधायक और मायावती के करीबी उमाशंकर पर संकट के बादल मंडरा गए हैं। बुधवार सुबह इनकम टैक्स विभाग ने बीएसपी के विधायक Uma Shankar Singh के लखनऊ स्थित आवास पर छापेमारी की। सुबह करीब 7 बजे 50 से अधिक अधिकारी कई गाड़ियों से गोमती नगर स्थित उनके घर पहुँचे। इस कार्रवाई के बाद प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई आयकर से जुड़े प्रावधानों के तहत की जा रही है। हालांकि विभाग की ओर से आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है। वित्तीय लेन-देन, संपत्ति से संबंधित कागजात और अन्य अभिलेखों को खंगाला जा रहा है। जांच प्रक्रिया के दौरान आवास के बाहर सुरक्षा घेरा बना दिया गया और आम लोगों के प्रवेश पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी गई।
आईटी की बीएसपी के विधायक के घर रेड
विधायक उमाशंकर सिंह 11 महीने पहले आय से अधिक संपत्ति के मामले में चर्चा में आए थे। उनके खिलाफ विजिलेंस ने जांच शुरू की थी। विजिलेंस ने उनके साथ ही उनकी पत्नी पुष्पा, बेटे युकेश और बेटी यामिनी के नाम पर खरीदी गई संपत्तियों का ब्योरा जुटाना शुरू किया था।
इसमें जमीन, मकान, फ्लैट, व्यावसायिक और कृषि संपत्तियां शामिल थींं। जांच के तहत विजिलेंस ने आईजी प्रयागराज को लेटर लिखकर संपत्तियों की डिलेट मांगी थी। इसके बाद आईजी ने संबंधित विभागों को जानकारी देने के निर्देश दिए थे। वाराणसी के उप-निबंधन कार्यालयों से भी रिकॉर्ड जुटाया गया था।
बता दें कि लंबे समय से बीमार चल रहे उमा शंकर सिंह बलिया जिले की रसड़ा सीट से बीएसपी के इकलौते MLA हैं। उन्हें मायावती का बहुत करीबी माना जाता है। उमा शंकर सिंह बलिया के सबसे पॉपुलर नेताओं में से एक हैं। वे उत्तर प्रदेश के पूर्वी इलाके में सबसे ज़्यादा फॉलो किए जाने वाले नेता हैं। उन्हें गरीबों का मसीहा भी कहा जाता है। कहा जाता है कि उन्होंने समाज के लिए बहुत बड़ा योगदान दिया है।
फरवरी 2016 में, उन्होंने 351 हिंदू और मुस्लिम सदस्यों के लिए एक सामूहिक विवाह का आयोजन किया, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। यही वजह है कि जब 2022 में BSP के सबसे बड़े नेता भी अपनी MLA सीटें बचाने में नाकाम रहे, तो उमा शंकर ने जीत हासिल की और BSP की लाज बचाई।
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इस कार्रवाई के बाद प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है। अगले वर्ष Uttar Pradesh में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं, ऐसे में इस छापेमारी को राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है।
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