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यूपी कैबिनेट बैठक में 37 प्रस्तावों को मंजूरी मिली। गेहूं MSP बढ़ाकर ₹2585 प्रति क्विंटल तय किया गया। ऊर्जा, सोलर और शहरी विकास परियोजनाओं को स्वीकृति मिली जिससे किसानों और राज्य के विकास को गति मिलेगी और रोजगार बढ़ेगा।
योगी सरकार की कैबिनेट बैठक (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजधानी में मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कुल 39 प्रस्ताव रखे गए, जिनमें से 37 प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई। बैठक में खाद्य, ऊर्जा, नगर विकास और पर्यटन से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जिनका सीधा असर राज्य के किसानों, शहरी विकास और औद्योगिक ढांचे पर पड़ेगा।
कैबिनेट बैठक को प्रदेश के विकास की दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। बैठक में रखे गए अधिकांश प्रस्तावों को सहमति मिली। खासतौर पर कृषि, ऊर्जा और शहरी विकास से जुड़े निर्णयों पर सरकार ने तेजी दिखाई। इन फैसलों से राज्य में निवेश, उत्पादन और बुनियादी ढांचे को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
बैठक के बाद कृषि मंत्री Surya Pratap Shahi ने किसानों से जुड़े निर्णयों की जानकारी साझा की।
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सरकार ने रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹2585 प्रति क्विंटल तय किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में ₹160 अधिक है। इसके साथ ही गेहूं खरीद 30 मार्च से 15 जून 2026 तक 6500 केंद्रों पर की जाएगी।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसानों को गेहूं की उतराई और सफाई का अतिरिक्त भुगतान भी दिया जाएगा, जिससे उनकी आय में सीधा इजाफा होगा। इस फैसले को किसान हितैषी नीति के रूप में देखा जा रहा है।
ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी मिली। घाटमपुर पावर प्लांट के लिए कोल माइन विकास हेतु ₹2242.90 करोड़ की स्वीकृति दी गई है, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ेगी।
इसके अलावा Gorakhpur को सोलर सिटी के रूप में विकसित करने की दिशा में 20 मेगावॉट क्षमता का फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट स्थापित करने का प्रस्ताव भी मंजूर किया गया है। यह कदम राज्य को नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में आगे ले जाने में मदद करेगा।
नगर विकास के तहत 'नवयुग पालिका योजना' को मंजूरी दी गई है, जो राज्य के 58 जिला मुख्यालयों में लागू होगी। इस योजना का उद्देश्य शहरी सेवाओं को आधुनिक बनाना और नगर निकायों की कार्यक्षमता बढ़ाना है।
इसके साथ ही Lucknow की ऐतिहासिक धरोहरों जैसे रोशन-उद-दौला और छतर मंजिल को पीपीपी मॉडल पर ‘हेरिटेज पर्यटन इकाई’ के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव भी शामिल किया गया है, जिससे पर्यटन और रोजगार दोनों को बढ़ावा मिलेगा।