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सहजनवां में यूजीसी के नए कानून के विरोध में अधिवक्ताओं ने प्रतीकात्मक हथकड़ियां पहनकर जोरदार प्रदर्शन किया और सरकार को चेतावनी दी कि कानून वापस न हुआ तो आंदोलन और तेज होगा।
सरकार की नीतियों के खिलाफ भड़के गोरखपुर के वकील
Gorakhpur News: गोरखपुर के सहजनवां में उच्च शिक्षा को लेकर सरकार के नए फैसले के खिलाफ माहौल गर्म हो गया है। यूजीसी के प्रस्तावित नए कानून के विरोध में प्रदेशभर में चल रहा आंदोलन अब और तेज होता नजर आ रहा है। गुरुवार को सहजनवां तहसील में अधिवक्ताओं ने जिस अंदाज में विरोध जताया, उसने साफ कर दिया कि यह लड़ाई अब सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहने वाली।
तहसील से थाना चौराहे तक विरोध मार्च
सहजनवां तहसील के अधिवक्ताओं ने एकजुट होकर तहसील परिसर से नारेबाजी शुरू की और जुलूस की शक्ल में थाना चौराहे तक पहुंचे। पूरे रास्ते सरकार विरोधी नारों से इलाका गूंजता रहा। प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने अपने हाथों में प्रतीकात्मक हथकड़ियां पहन रखी थी, जो यह संदेश दे रही थी कि नया यूजीसी कानून शिक्षा और स्वायत्तता को जकड़ने का काम करेगा।
यूजीसी कानून पर कड़ा ऐतराज
प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ताओं का कहना था कि नया यूजीसी कानून उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए बेहद खतरनाक साबित होगा। उनका आरोप है कि इस कानून के लागू होने से विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की स्वायत्तता खत्म हो जाएगी और पूरा सिस्टम केंद्र के नियंत्रण में चला जाएगा। अधिवक्ताओं का कहना था कि शिक्षा का अत्यधिक केंद्रीयकरण शैक्षणिक गुणवत्ता को नुकसान पहुंचाएगा और राजनीतिक हस्तक्षेप को बढ़ावा देगा।
एसडीएम को सौंपा गया ज्ञापन
अपने विरोध को औपचारिक रूप देते हुए अधिवक्ताओं ने उपजिलाधिकारी केशरी नंदन तिवारी को एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में नए यूजीसी कानून को तत्काल वापस लेने की मांग की गई। एसडीएम ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए आश्वासन दिया कि अधिवक्ताओं की मांगों को उच्चाधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा।
आश्वासन नहीं, कार्रवाई चाहिए
हालांकि अधिवक्ताओं ने साफ कहा कि केवल आश्वासन से उनका आंदोलन खत्म नहीं होगा। जब तक यह कानून वापस नहीं लिया जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कृष्ण कुमार त्रिपाठी ने कहा कि अधिवक्ता समाज हमेशा संविधान, लोकतंत्र और शिक्षा की आजादी के पक्ष में खड़ा रहा है।
आंदोलन को प्रदेश स्तर तक ले जाने की चेतावनी
प्रदर्शन के दौरान मंत्री राघवेंद्र सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकार ने जल्द इस कानून पर पुनर्विचार नहीं किया, तो यह आंदोलन जिला स्तर से निकलकर पूरे प्रदेश में फैलाया जाएगा। प्रदर्शन में रमाकांत उपाध्याय, बृजेंद्र मिश्र, भूपेंद्र कुमार तिवारी, अनिल कुमार तिवारी, भूपेश तिवारी, अखंड प्रताप सिंह, नीरज श्रीवास्तव, शैलेंद्र श्रीवास्तव, उमेश त्रिपाठी, सुनील कुमार, अभिषेक तिवारी, अभिषेक श्रीवास्तव, सन्नी शुक्ला सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।