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प्रदेशभर में यूजीसी के नए कानून को लेकर छात्रों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। राजधानी लखनऊ में बुधवार को राष्ट्र छात्र पंचायत से जुड़े छात्रों ने प्रदर्शन कर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
राष्ट्र छात्र पंचायत से जुड़े छात्रों का प्रदर्शन
Lucknow: प्रदेशभर में यूजीसी के नए कानून को लेकर छात्रों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। राजधानी लखनऊ में बुधवार को राष्ट्र छात्र पंचायत से जुड़े छात्रों ने प्रदर्शन कर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। छात्रों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि यदि सरकार ने यूजीसी का नया कानून वापस नहीं लिया, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि यह कानून उच्च शिक्षा के ढांचे और छात्रों के हितों के खिलाफ है।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने 13 जनवरी 2026 को उच्च शिक्षण संस्थानों में समता के संवर्धन के लिए “UGC समता विनियम 2026” को अधिसूचित किया है। इस नियम का उद्देश्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जाति, धर्म, लिंग, नस्ल, जन्म स्थान और दिव्यांगता के आधार पर होने वाले भेदभाव को समाप्त करना है। नए नियमों के तहत सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में इक्विटी कमेटी, इक्विटी स्क्वाड और 24x7 हेल्पलाइन की स्थापना अनिवार्य कर दी गई है।
छात्र संगठनों का आरोप है कि सरकार इस कानून के ज़रिए विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता में हस्तक्षेप कर रही है। छात्रों का कहना है कि नियम अस्पष्ट हैं। शिकायत प्रणाली का दुरुपयोग हो सकता है। शिक्षकों और छात्रों पर अनावश्यक निगरानी बढ़ेगी। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का दावा है कि यह कानून लागू होने से शैक्षणिक माहौल प्रभावित होगा।
UGC के अनुसार, यह नियम अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और दिव्यांग व्यक्तियों को किसी भी प्रकार के भेदभाव से सुरक्षा प्रदान करता है। नियम के तहत संस्थानों को भेदभाव से जुड़ी शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई करनी होगी।
कानून के समर्थकों का कहना है कि यह नियम कैंपस में समानता सुनिश्चित करेगा दलित और पिछड़े वर्ग के छात्रों को न्याय मिलेगा। भेदभाव की घटनाओं पर रोक लगेगी। उनका मानना है कि यह कानून उच्च शिक्षा को अधिक समावेशी बनाएगा।
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छात्र संगठनों ने साफ़ चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने यूजीसी कानून को वापस नहीं लिया, तो प्रदेशभर में प्रदर्शन और तेज किए जाएंगे। अब यह देखने वाली बात होगी कि सरकार इस विरोध को संवाद से सुलझाती है या आंदोलन और व्यापक रूप लेता है।