
दहेज हत्या में दोषी ठहराया गया सुनील साहनी (IMG: Pinterest)
Gorakhpur: दहेज हत्या के करीब दो साल पुराने मामले में गोरखपुर की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। प्रभावी पैरवी और अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी सुनील साहनी को दोषी करार दिया। अदालत ने उसे सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाने के साथ 60 हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया है। फैसला सामने आने के बाद पुलिस ने इसे गंभीर अपराधों में प्रभावी पैरवी की अहम सफलता बताया है।
मामला वर्ष 2024 में खोराबार थाना क्षेत्र में दर्ज हुआ था। पुलिस के मुताबिक, मुकदमा अपराध संख्या 70/2024 में सुनील साहनी पुत्र बंशी साहनी, निवासी रामपुर केरवनिया, थाना खोराबार, गोरखपुर के खिलाफ दहेज हत्या और दहेज उत्पीड़न से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था।
पुलिस के अनुसार, खोराबार थाने में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 70/2024 में सुनील साहनी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 304बी, 498ए और 3/4 डीपी एक्ट के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया था। मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने इसकी विवेचना शुरू की। जांच के दौरान मामले से जुड़े साक्ष्यों और अभिलेखों को जुटाया गया। विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया। इसके बाद अदालत में मामले की सुनवाई शुरू हुई।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। पुलिस के मुताबिक, प्रभावी पैरवी के साथ मामले से जुड़े अभिलेख और साक्ष्य न्यायालय के सामने रखे गए। इन साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की पैरवी के आधार पर मा. न्यायालय ASJ/UPSEB कोर्ट, गोरखपुर ने आरोपी सुनील साहनी को दोषी पाया। अदालत ने उसे सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही आरोपी पर 60 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया।
गोरखपुर पुलिस ने इस दोषसिद्धि को उत्तर प्रदेश पुलिस के “ऑपरेशन कनविक्शन” अभियान से जोड़कर देखा है। पुलिस के अनुसार, इस अभियान के तहत गंभीर आपराधिक मामलों में आरोपियों को न्यायालय से सजा दिलाने के लिए मुकदमों की लगातार मॉनिटरिंग की जाती है। इसी क्रम में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गोरखपुर के निर्देशन में खोराबार थाना के पैरोकार और मॉनिटरिंग सेल ने इस मुकदमे की पैरवी पर लगातार नजर बनाए रखी। पुलिस का कहना है कि मामले से जुड़े साक्ष्यों और अभिलेखों को न्यायालय के समक्ष प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया गया।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी की दोषसिद्धि में ADGC श्रद्धानन्द पाण्डेय और ADGC रविन्द्र सिंह की प्रभावी पैरवी का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। अभियोजन की ओर से मामले से जुड़े तथ्यों और साक्ष्यों को न्यायालय के सामने मजबूती से रखा गया। इसके बाद अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए सात वर्ष के कठोर कारावास और 60 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक “ऑपरेशन कनविक्शन” के तहत गंभीर आपराधिक मामलों में दोषियों को अदालत से सजा दिलाने की प्रक्रिया लगातार जारी है। इसके लिए पुराने और गंभीर मामलों की मॉनिटरिंग, अभियोजन पक्ष से समन्वय और न्यायालय में प्रभावी पैरवी पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
Location : Gorakhpur
Published : 7 September 2026, 7:46 PM IST