सोनभद्र में 12 फरवरी 2026 को जिलाधिकारी कार्यालय पर देश के दस प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन केंद्र और राज्य सरकारों की मजदूर-विरोधी, किसान-विरोधी, जन-विरोधी और निजीकरण समर्थक नीतियों के खिलाफ एक दिवसीय अखिल भारतीय हड़ताल के समर्थन में आयोजित किया गया था।

श्रम संहिता रद्द करने और निजीकरण रोकने की मांग
Sonbhadra: सोनभद्र में 12 फरवरी 2026 को जिलाधिकारी कार्यालय पर देश के दस प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन केंद्र और राज्य सरकारों की मजदूर-विरोधी, किसान-विरोधी, जन-विरोधी और निजीकरण समर्थक नीतियों के खिलाफ एक दिवसीय अखिल भारतीय हड़ताल के समर्थन में आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
इस संयुक्त आह्वान में INTUC, AITUC, HMS, CITU, AIUTUC, AICCTU, TUCC, SEWA, LPF, UTUC सहित केंद्र व राज्य सरकार के कर्मचारी संगठन, औद्योगिक क्षेत्र के स्वतंत्र फेडरेशन और भारतीय किसान यूनियन शामिल थे।
इंटक के जिलाध्यक्ष हरदेवनारायण तिवारी ने कहा कि सरकार द्वारा बनाए गए चारों श्रम संहिता श्रमिकों के अधिकारों को कमजोर करती हैं और इन्हें तत्काल रद्द किया जाना चाहिए। उन्होंने विद्युत संशोधन विधेयक 2025 और अन्य जन-विरोधी संशोधन विधेयकों को वापस लेने की भी मांग की। जिला कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष और इंटक उपाध्यक्ष बृजेश तिवारी ने कहा कि मनरेगा को कमजोर करना, ग्रामीण रोजगार और आजीविका की गारंटी समाप्त करना, न्यूनतम वेतन लागू न करना, ठेका-संविदा-आउटसोर्स व्यवस्था को बढ़ावा देना और सार्वजनिक क्षेत्रों का निजीकरण मजदूरों, किसानों और आम जनता के लिए संकट पैदा कर रहा है।
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प्रदर्शनकारियों ने चारों श्रम संहिताओं को रद्द करने, विद्युत संशोधन विधेयक 2025 और बीज बिल 2025 को वापस लेने, बीवी रामजी कानून को समाप्त कर मनरेगा को मजबूत करने, न्यूनतम वेतन ₹26,000 प्रति माह सुनिश्चित करने और उप-समिति गठित करने की मांग उठाई। इसके अलावा पुरानी पेंशन योजना बहाल करने, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, कोयला, तेल, रेल, भेल, बैंक, बीमा सहित सभी सार्वजनिक क्षेत्रों के निजीकरण पर रोक लगाने की भी मांग की गई।
Sonbhadra में 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और कर्मचारी संगठनों का जोरदार प्रदर्शन। प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा, जिसमें चारों श्रम संहिताओं को रद्द करने, सार्वजनिक क्षेत्रों के निजीकरण पर रोक लगाने, न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करने और मनरेगा को मजबूत… pic.twitter.com/8y2EFnVxWA
— डाइनामाइट न्यूज़ हिंदी (@DNHindi) February 12, 2026
प्रदर्शनकारियों ने स्कीम वर्कर्स को राज्य कर्मचारी का दर्जा देते हुए ₹26,000 मासिक मानदेय और ₹10,000 मासिक पेंशन देने, ठेका, संविदा और आउटसोर्स श्रमिकों को नियमित करने, घरेलू कामगारों और होम-बेस्ड वर्कर्स को मजदूर का दर्जा देने और कल्याण बोर्ड गठित करने की मांग की। इसके साथ ही ई-श्रम एवं विभिन्न बोर्डों में पंजीकृत सभी श्रमिकों को आयुष्मान कार्ड और सामाजिक सुरक्षा देने की भी मांग रखी गई।
प्रदर्शन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आशुतोष दुबे, आकाश वर्मा, जयशंकर भारद्वाज, एच. के. उपाध्याय, राजेश देव पांडे, हरिशंकर गौड़, राजाराम भारती, मुकेश चेरो, प्रहलाद गुप्ता, जवाहर यादव, दूधनाथ खरवार, शिवप्रसाद खरवार, सुरेंद्र गौड़, जिब्रील खान, रामचंद्र मौर्य, स्वतंत्र श्रीवास्तव, कौशल्या देवी, मीना देवी, कुंती देवी और शांति देवी आदि शामिल रहे।
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नेताओं ने देश के सभी मजदूरों, किसानों, कर्मचारियों, स्कीम वर्कर्स और आम जनता से आगामी आंदोलनों में समर्थन देकर सहयोग करने की अपील की, ताकि मजदूरों और गरीबों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।