नौतनवा तहसील परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। तहसील समाधान दिवस के दौरान बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने खुलकर प्रशासनिक लापरवाही का मुद्दा उठाया और एसडीएम को ज्ञापन सौंपते हुए चैंबरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

नौतनवा तहसील में अधिवक्ताओं के चैंबर के ताले टूटे
महराजगंज: नौतनवा तहसील परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। तहसील समाधान दिवस के दौरान बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने खुलकर प्रशासनिक लापरवाही का मुद्दा उठाया और एसडीएम को ज्ञापन सौंपते हुए चैंबरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
अधिवक्ताओं का आरोप है कि तहसील परिसर में स्थित उनके कई चैंबरों के ताले रात में लगातार तोड़े जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि परिसर में एसडीएम और क्षेत्राधिकारी (CO) पुलिस का कार्यालय भी स्थित है, इसके बावजूद अराजक तत्वों और नशेड़ियों की आवाजाही पर कोई प्रभावी रोक नहीं है।
अधिवक्ता नागेंद्र शुक्ला ने कहा कि जब प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के कार्यालय के बगल में ही ऐसी घटनाएं हो रही हैं, तो आम नागरिक की सुरक्षा का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में कोई बड़ी घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
बार एसोसिएशन ने ज्ञापन के माध्यम से तहसील परिसर में नियमित पुलिस गश्त, सीसीटीवी निगरानी और रात्रि सुरक्षा की व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।
तहसील समाधान दिवस में दोपहर एक बजे तक मात्र 54 शिकायतें दर्ज हुईं। जमीन विवाद, चकबंदी, आवास, अवैध कब्जा, नाली निर्माण और राष्ट्रीय राजमार्ग चौड़ीकरण से जुड़े मुआवजे के मामले प्रमुख रूप से सामने आए।
सभागार में अधिकारियों की उपस्थिति भी सीमित रही और कई कुर्सियां खाली नजर आईं। फरियादियों की कम संख्या से समाधान दिवस के प्रति घटती रुचि की झलक दिखाई दी। हालांकि एसडीएम दोपहर दो बजे तक सभागार में मौजूद रहकर लोगों की समस्याएं सुनते रहे।
समाधान दिवस के दौरान एक जनप्रतिनिधि ने बीडीओ नौतनवा से ग्राम पंचायत की जनसूचना में वर्षों से हो रही देरी को लेकर कड़ी नाराजगी जताई। इस पर बीडीओ अमित मिश्रा ने बताया कि संबंधित ग्राम पंचायत अधिकारी के विरुद्ध वेतन बाधित करने की कार्रवाई हेतु जिला पंचायत राज अधिकारी को पत्र भेजा गया है।
तहसील परिसर में सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल अब प्रशासन के लिए चुनौती बन गए हैं। देखना होगा कि अधिवक्ताओं की मांगों पर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।