दीपावली पर मिला बेरोजगारी का जख्म! सहारनपुर की दया शुगर मिल अचानक बंद, 300 से अधिक मजदूरों का प्रदर्शन

दिवाली से पहले अचानक मिल बंदी का नोटिस और 300 से ज्यादा मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट। आखिर कर्मचारियों की बकाया राशि का भुगतान होगा या दया शुगर मिल दोबारा शुरू होगी?

Post Published By: Pratibha Yadav
Updated : 29 October 2026, 9:06 PM IST
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Saharanpur: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के गागलहेड़ी स्थित दया शुगर मिल बंद होने से सैकड़ों कर्मचारियों के सामने रोजगार और परिवार के भरण-पोषण का संकट खड़ा हो गया है। मिल बंदी के विरोध में कर्मचारियों ने लेबर कमिश्नर कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया। इस दौरान यूनियन लीडर अमरपाल सिंह ने मिल प्रबंधन पर बिना पूर्व सूचना के बंदी का फैसला लेने का आरोप लगाया। कर्मचारियों का कहना है कि अचानक लिए गए इस फैसले से 300 से अधिक मजदूरों की रोजी-रोटी पर असर पड़ा है।

अचानक नोटिस से मजदूरों में नाराजगी

यूनियन लीडर अमरपाल सिंह के मुताबिक, 21 तारीख को मिल बंद करने का नोटिस अचानक लगा दिया गया। उनका आरोप है कि इस फैसले से पहले कर्मचारियों के साथ कोई चर्चा नहीं की गई और न ही उन्हें इसकी जानकारी दी गई थी। अचानक बंदी की सूचना मिलने के बाद मजदूरों के सामने भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई। इसी के विरोध में कर्मचारी अपनी मांगें लेकर लेबर कमिश्नर कार्यालय पहुंचे।

मजदूरों का कहना है कि यदि प्रबंधन मिल बंद करने का फैसला कर चुका है, तो उन्हें इससे जुड़े नियमों के अनुसार उनका बकाया भुगतान किया जाना चाहिए। कर्मचारियों की मांग है कि उनका जो भी पैसा बनता है, उसका भुगतान सुनिश्चित करने के बाद ही आगे की प्रक्रिया पूरी की जाए।

एमडी पर फोन नहीं उठाने और मुलाकात से बचने का आरोप

अमरपाल सिंह ने मिल के एमडी सत्येंद्र प्रकाश अग्रवाल और उनकी पत्नी अमिता सिंह पर भी आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि मिल बंद होने के बाद उन्होंने दोनों से मिलने की कोशिश की और कई बार फोन करने के साथ व्हाट्सऐप पर संदेश भी भेजे, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। हालांकि, इन आरोपों पर मिल प्रबंधन का पक्ष सामने नहीं आया है।

यूनियन लीडर ने प्रशासन और मिल प्रबंधन के बीच मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि कर्मचारियों को बिना उचित व्यवस्था के रोजगार से वंचित किया जा रहा है। ये मजदूर लंबे समय से मिल में काम कर रहे थे और अब अचानक रोजगार छिनने से उनके सामने आर्थिक परेशानियां खड़ी हो गई हैं।

300 से ज्यादा मजदूरों पर रोजगार का संकट (Img: Dynamite News)

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40 से 50 साल तक मिल में किया काम

प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों के मुताबिक, कुछ मजदूर पिछले 40 साल से तो कुछ करीब 50 साल से मिल में काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा इसी मिल में बिताया है। अब उम्र के इस पड़ाव पर दूसरी नौकरी मिलना भी आसान नहीं है।

मजदूरों के सामने बच्चों की शादी, परिवार का खर्च चलाने और कर्ज चुकाने जैसी जिम्मेदारियां हैं। ऐसे में मिल बंद होने से उनकी चिंता बढ़ गई है। कर्मचारियों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि दिवाली के समय मिला यह फैसला उनके लिए लंबे समय तक याद रहने वाला दर्द बन गया है।

डीएलसी ने जिम्मेदार लोगों को बुलाने का दिया आश्वासन

अमरपाल सिंह ने बताया कि इस मामले को लेकर वे जिलाधिकारी समेत कई अधिकारियों से मिल चुके हैं। उनके मुताबिक, डीएलसी ने फोन पर आश्वासन दिया है कि वह उस दिन सहारनपुर से बाहर हैं और अगले दिन दो से चार जिम्मेदार लोगों को बुलाकर मामले पर बात करेंगे। कर्मचारियों की ओर से कार्यालय में ज्ञापन भी सौंपा गया है।

यूनियन लीडर ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो मजदूर लेबर कमिश्नर कार्यालय में ही दरी बिछाकर धरना देने को मजबूर होंगे। कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री से भी हस्तक्षेप करने की अपील की है। उनकी मांग है कि या तो बकाया राशि का भुगतान कराया जाए या मिल को दोबारा शुरू कराने की दिशा में कदम उठाए जाएं।

सहारनपुर में चीनी मिलों के बंद होने पर उठे सवाल

प्रदर्शनकारियों ने सहारनपुर जिले में चीनी मिलों के बंद होने का मुद्दा भी उठाया। उनके मुताबिक, जिले में कुल आठ चीनी मिलें हैं, जिनमें बजाज हिंदुस्तान शुगर मिल गांगनौली, त्रिवेणी इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रीज देवबंद, उत्तम शुगर मिल शेरमऊ, किसान सहकारी चीनी मिल सरसावा और नानौता, बिड़वी शुगर मिल तथा दया शुगर मिल गागलहेड़ी शामिल हैं। इसके अलावा शाकुंभरी शुगर एंड एलाइड इंडस्ट्रीज टोडरपुर/रत्नौली के भी पहले बंद होने की बात कही गई है।

मजदूरों का दावा है कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में जिले की दो चीनी मिलें बंद हो चुकी हैं। उनका कहना है कि एक ओर बंद पड़ी मिलों को दोबारा शुरू करने की बात कही जाती है, वहीं दूसरी ओर मिल बंद होने से श्रमिकों के सामने रोजगार का संकट गहरा रहा है। हालांकि, मिलों की बंदी और उनके कारणों से संबंधित सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन (Img: Dynamite News)

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प्रदर्शन में कई कर्मचारी रहे मौजूद

दया शुगर मिल बंद होने के विरोध में हुए प्रदर्शन में यूनियन लीडर अमरपाल सिंह के साथ मोहम्मद एमरोज, विनीत कुमार, राकेश कुमार, पवन त्यागी, नरेश त्यागी, संजय शर्मा, मेला राम, हुसैन अहमद, अंकित, विनोद शर्मा, सचिन और भोज कुमार समेत कई मजदूर शामिल रहे।

फिलहाल कर्मचारी बकाया भुगतान या मिल दोबारा शुरू कराने की मांग पर अड़े हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन और मिल प्रबंधन की ओर से इस मामले में क्या कदम उठाए जाते हैं और प्रभावित कर्मचारियों को राहत मिल पाती है या नहीं।

Location :  Saharanpur

Published :  29 October 2026, 9:06 PM IST

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