‘RSS को सत्ता की चाहत नहीं’…मेरठ की धरती पर मोहन भागवत ने क्यों बोली इतनी बड़ी बात?

मेरठ में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने खिलाड़ियों से संवाद के दौरान कहा कि आरएसएस का उद्देश्य राजनीतिक सत्ता नहीं, बल्कि समाज संगठन और व्यक्ति निर्माण के जरिए राष्ट्रनिर्माण को मजबूत करना है।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 21 February 2026, 7:23 AM IST

Meerut: मेरठ में शुक्रवार को माहौल अलग ही था। शताब्दी नगर स्थित माधव कुंज में जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत पहुंचे तो करीब 950 खिलाड़ियों की मौजूदगी में उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि संघ का उद्देश्य राजनीतिक सत्ता हासिल करना नहीं है। उनका कहना था कि संघ का काम अपना नाम बड़ा करना नहीं, बल्कि देश का नाम ऊंचा करना है। करीब 50 मिनट के संबोधन में उन्होंने बार-बार दोहराया कि संगठन किसी स्पर्धा, विरोध या सत्ता की दौड़ में नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने के मिशन में लगा है।

शताब्दी वर्ष और 100 साल की यात्रा का जिक्र

संघ प्रमुख ने अपने संबोधन में संगठन की लगभग 100 साल की यात्रा का जिक्र किया। उन्होंने युवाओं से राष्ट्रनिर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। प्रतिभागियों के मुताबिक उन्होंने कहा कि संघ किसी समूह के विरोध में नहीं, बल्कि सामाजिक एकता को मजबूत करने के लिए काम करता है।

भारत की आत्मा पर विचार

भारत की अवधारणा पर बोलते हुए मोहन भागवत ने कहा कि देश को केवल भौगोलिक सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता। उन्होंने भगवान राम, भगवान कृष्ण, भगवान बुद्ध, भगवान महावीर, स्वामी विवेकानंद, स्वामी दयानंद और महात्मा गांधी की परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की आत्मा इन महापुरुषों की प्रेरणा से बनी है। उनके मुताबिक ‘हिंदू’ शब्द विविधता में एकता का प्रतीक है, न कि जाति का द्योतक। पूजा-पद्धतियां भले अलग हों, लेकिन सांस्कृतिक आधार एक है।

समाज के चार स्तंभों का उल्लेख

भागवत ने संस्कार, सनातन संस्कृति, धर्मभाव और सत्यनिष्ठा को समाज के चार स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि जब-जब सामाजिक एकता कमजोर हुई, तब-तब राष्ट्र को संकटों का सामना करना पड़ा। संघ का मिशन व्यक्ति निर्माण के माध्यम से पूरे समाज को संगठित करना है और स्वयंसेवक अलग-अलग क्षेत्रों में राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानकर काम कर रहे हैं।

खिलाड़ियों से खास संवाद

खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रनिर्माण किसी एक संगठन का काम नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। खेल को उन्होंने लोगों को जोड़ने का सशक्त माध्यम बताया। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में मेरठ की भूमिका का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यही ऐतिहासिक पृष्ठभूमि आगे चलकर डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को 1925 में संघ की स्थापना के लिए प्रेरित करने वाली बनी।

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Published : 
  • 21 February 2026, 7:23 AM IST