
चंपत राय (Img : pinterest)
Ayodhya: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की हालिया बैठक के बाद अयोध्या से आ रहे बयानों ने मंदिर प्रबंधन के भीतर चल रही खींचतान की परतें खोल दी हैं। ताजा खुलासे के मुताबिक, ट्रस्ट के आधिकारिक ट्रेजरी प्रभारी और कोषाध्यक्ष भले ही स्वामी गोविंद देव गिरी हैं, लेकिन वित्तीय खजाने की असली चाबी पूर्व महासचिव चंपत राय के पास ही थी। बतौर महासचिव चंपत राय ही पूरा लेनदेन, खर्च और वित्तीय प्रबंधन संभाल रहे थे।
खुद गोविंद देव गिरी के बयानों से इस बात की पुष्टि हुई है कि उनकी भूमिका वित्तीय मामलों में न के बराबर थी। सूत्रों का कहना है कि चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल नाम के व्यक्ति ही मिलकर पूरा मंदिर प्रबंधन और वित्तीय ढांचा चला रहे थे, जिससे ट्रस्ट की पारदर्शिता पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ट्रस्ट की अहम बैठक से पहले गोविंद देव गिरी ने एक बयान जारी कर अपनी बेबसी और मंदिर प्रबंधन की कार्यशैली को उजागर किया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि वह अधिकतर समय प्रवास (यात्राओं) पर रहते हैं और महीने-डेढ़ महीने में सिर्फ एक बार अयोध्या आते हैं। हर महीने पुणे से उनकी सीए टीम आकर लेखा-जोखा तैयार करती है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बैंक संबंधी किसी भी व्यय या लेनदेन के मामले में उनके कहीं कोई हस्ताक्षर नहीं होते हैं। उन्होंने यहां तक स्वीकार किया कि दानपात्रों के पैसों की गणना की पूरी प्रक्रिया उन्होंने पहली बार पिछले महीने ही समझी थी, इससे पहले उन्हें इस प्रक्रिया की कोई जानकारी नहीं थी।
इस बड़े डोनेशन स्कैम के सामने आने के बाद जब मीडिया चैनलों ने गोविंद देव गिरी से तीखे सवाल किए और पूछा कि मंदिर की रकम चोरी होने के नाते क्या वह नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देंगे, तो वह बुरी तरह भड़क गए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह अपने पद से कतई इस्तीफा नहीं देंगे। उन्होंने दलील दी कि इस पूरी वित्तीय गड़बड़ी में उनकी किसी भी तरह की कोई भूमिका या दखल नहीं रहा है। जो लोग इस चोरी में सीधे तौर पर दोषी हैं, उन पर पुलिस और प्रशासन सख्त कार्रवाई कर रहा है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि कागजी लिखापढ़ी में कोषाध्यक्ष होने के नाते वह पूरी तरह अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकते।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में चौतरफा घिरे ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी चुप्पी तोड़ी है। मंगलवार को जारी एक हस्तलिखित बयान में उन्होंने कहा कि 7 जून 2026 से दानपात्रों की गिनती के दौरान हुई चोरी को लेकर कई तरह की अफवाहें और चर्चाएं चल रही हैं। उनके ऊपर बेहद गंभीर आरोप लगाए गए हैं, लेकिन फिलहाल उन्होंने मौन धारण कर लिया है। चंपत राय ने एसआईटी (SIT) की लीक हुई प्रारंभिक रिपोर्ट पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जो रिपोर्ट परम गोपनीय होनी चाहिए थी, वह अब सार्वजनिक हो चुकी है।
चंपत राय ने देश और भक्तों को आश्वस्त किया है कि एसआईटी की अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद वह उन पर लगाए जा रहे सभी आरोपों और उठाए जा रहे बिंदुओं का क्रमवार और तथ्यात्मक जवाब देंगे, जिसके बाद पूरा सच दुनिया के सामने आ जाएगा। उन्होंने भावुक होते हुए लिखा कि वह वर्ष 1991 से अयोध्या में संगठन के कार्य के लिए समर्पित हैं और उनका लगभग 45 वर्षों का सार्वजनिक जीवन एक खुली किताब की तरह बेदाग रहा है। उन्हें न्यायपालिका और जांच पर पूरा भरोसा है कि अंततः जीत सत्य की ही होगी।
Location : Ayodhya
Published : 8 July 2026, 8:30 AM IST