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रायबरेली में राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी समेत 45 लोगों के खिलाफ MP-MLA कोर्ट में अर्जी दाखिल की गई है। आरोप है कि स्कूल को CBSE मान्यता दिलाने में सरकारी दस्तावेजों में हेराफेरी की गई। कोर्ट ने पुलिस से रिपोर्ट मांगी है।
रायबरेली में बड़ा कानूनी घटनाक्रम (Img- Internet)
Raebareli: जिले में एक बड़े कानूनी घटनाक्रम के तहत राहुल गांधी, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी समेत कुल 45 लोगों के खिलाफ अदालत में अर्जी दाखिल की गई है। यह अर्जी पांजा फाउंडेशन की ओर से MP-MLA कोर्ट में दी गई है, जिससे राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है।
शिकायत के अनुसार यह मामला एक स्कूल को CBSE बोर्ड से मान्यता दिलाने से जुड़ा है। आरोप लगाया गया है कि मान्यता प्राप्त करने की प्रक्रिया के दौरान सरकारी अभिलेखों में हेराफेरी की गई और कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ। फाउंडेशन का दावा है कि जिस जमीन पर स्कूल बना है, उसका वैध लैंड सर्टिफिकेट जारी ही नहीं किया गया था।
याचिकाकर्ता बृजेंद्र शरण गांधी ने बताया कि इस मामले में बैलीगंज पाठशाला की जमीन और तालाब की सरकारी भूमि पर कब्जे का आरोप है। उनका कहना है कि रमेश बहादुर सिंह उर्फ भुनाफिया द्वारा यह कब्जा किया गया, जिसमें कुछ अधिकारी और कर्मचारी भी कथित तौर पर शामिल हैं।
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अर्जी में केवल राजनीतिक हस्तियों के ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं। इसमें रायबरेली की जिलाधिकारी हर्षिता माथुर और एडीएम अमृता सिंह के नाम भी दर्ज किए गए हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
MP-MLA कोर्ट ने मांगी पुलिस रिपोर्ट (Img- Internet)
बृजेंद्र शरण गांधी ने दावा किया कि इस पूरे मामले की शिकायत पहले प्रधानमंत्री कार्यालय तक भी पहुंचाई गई थी। उनके अनुसार, PMO कार्यालय से संबंधित शिकायत पर कलेक्टर द्वारा जांच आख्या भेजी गई थी, जिसमें शिकायत को सही माना गया और पुलिस से कार्रवाई की अपेक्षा जताई गई थी।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि शिकायत सही पाए जाने के बावजूद अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई। जिलाधिकारी द्वारा आवेदन रख लिया गया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में उनके पास न्यायालय का सहारा लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए MP-MLA कोर्ट ने कोतवाली पुलिस से रिपोर्ट तलब की है। अदालत अब पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगी। इस घटनाक्रम से जिले की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
फिलहाल सभी की निगाहें पुलिस रिपोर्ट और अदालत के अगले आदेश पर टिकी हैं। यह मामला न केवल राजनीतिक रूप से संवेदनशील है, बल्कि सरकारी जमीन और दस्तावेजों की पारदर्शिता से भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है।