मीरजापुर में अडानी पावर के खिलाफ प्रदर्शन, 100 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप; प्लांट विस्तार रोकने की मांग

मीरजापुर के मड़िहान क्षेत्र में निर्माणाधीन 1600 मेगावाट के अडानी थर्मल पावर प्लांट को लेकर विरोध तेज हो गया है। श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना ने जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन कर करीब 100 एकड़ सरकारी जमीन पर कथित कब्जे, किसानों के मुआवजे, पानी की कमी और प्रदूषण से जुड़े मुद्दे उठाए और जिलाधिकारी को पत्रक सौंपकर जांच की मांग की।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 5 October 2026, 6:26 PM IST
google-preferred

Mirzapur News: मीरजापुर के मड़िहान क्षेत्र में निर्माणाधीन अडानी समूह के 1600 मेगावाट थर्मल पावर प्लांट को लेकर विरोध सामने आया है। श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना की ओर से जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन कर परियोजना के विस्तार पर रोक लगाने की मांग की गई। संगठन ने जिलाधिकारी को पत्रक सौंपकर आरोप लगाया कि मड़िहान तहसील के ददरी खुर्द क्षेत्र में पावर प्लांट के लिए करीब 100 एकड़ से अधिक सरकारी जमीन पर भी कथित तौर पर कब्जा किया गया है। संगठन ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

ददरी खुर्द में 1600 मेगावाट का पावर प्लांट

मड़िहान तहसील क्षेत्र के ददरी खुर्द गांव में अडानी समूह की कंपनी मिर्जापुर थर्मल एनर्जी (यूपी) प्राइवेट लिमिटेड की ओर से 2×800 मेगावाट यानी कुल 1600 मेगावाट क्षमता का कोयला आधारित अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट स्थापित किया जा रहा है। अडानी समूह की अपनी वेबसाइट पर भी मिर्जापुर में 1600 मेगावाट की ग्रीनफील्ड क्षमता स्थापित किए जाने का उल्लेख है।

100 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जे का लगाया आरोप

प्रदर्शन के दौरान श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के जिलाध्यक्ष दिलीप सिंह गहरवार एडवोकेट ने आरोप लगाया कि पावर प्लांट के विस्तार के लिए किसानों की जमीन के साथ-साथ नाले, नदी और जंगल से जुड़ी जमीन को भी कथित रूप से परियोजना के दायरे में लिया जा रहा है। संगठन का दावा है कि 100 एकड़ से अधिक सरकारी जमीन को भी कथित तौर पर अधिग्रहित या कब्जे में लिया गया है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि राजस्व अभिलेखों की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि परियोजना के लिए इस्तेमाल की जा रही जमीन का वास्तविक स्वामित्व क्या है और यदि किसी सरकारी भूमि का नियमों के विपरीत इस्तेमाल हुआ है तो उसे मुक्त कराया जाए।

बंद मकानों की रेकी, फिर ताला तोड़कर चोरी, मीरजापुर में 5 शातिर चोर गिरफ्तार; 7 लाख का माल बरामद

पर्यावरण को लेकर भी उठाए सवाल

प्रदर्शनकारियों ने सिर्फ सरकारी जमीन का मुद्दा ही नहीं उठाया, बल्कि किसानों की जमीन, मुआवजे और पर्यावरण से जुड़े सवाल भी सामने रखे। संगठन की ओर से दावा किया गया कि कुछ किसानों को उनकी जमीन का पर्याप्त मुआवजा नहीं मिला और परियोजना के कारण स्थानीय स्तर पर पानी की समस्या और प्रदूषण का खतरा बढ़ सकता है। पावर प्लांट को लेकर पहले भी स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं की ओर से जमीन, जंगल, पानी और प्रदूषण से संबंधित आपत्तियां उठाई जाती रही हैं।

जनसुनवाई को लेकर भी उठे थे सवाल

परियोजना की पर्यावरणीय प्रक्रिया के दौरान आयोजित जनसुनवाई को लेकर भी आपत्तियां सामने आई थीं। 11 अप्रैल 2025 को हुई जनसुनवाई के संबंध में कुछ प्रभावित लोगों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि परियोजना से प्रभावित समुदायों को पर्याप्त तरीके से अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिला। राष्ट्रीय हरित अधिकरण में दाखिल दस्तावेजों में भी जनसुनवाई के स्थान और प्रभावित गांव के संबंध में आपत्तियां दर्ज होने की जानकारी सामने आती है।

पर्यावरणीय आपत्तियों का सामना करना पड़ा

मीरजापुर पावर प्रोजेक्ट को लेकर विवाद नया नहीं है। परियोजना पहले वेलस्पन समूह से जुड़ी थी और 1320 मेगावाट क्षमता के पुराने प्रस्ताव को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण में मामला पहुंचा था। बाद में परियोजना अडानी समूह की कंपनी से जुड़ी। पर्यावरणीय मुद्दों को लेकर पुरानी मंजूरी पर भी कानूनी चुनौती दी गई थी। परियोजना के मौजूदा 1600 मेगावाट प्रस्ताव को लेकर पर्यावरण मंजूरी की प्रक्रिया भी चली।

पहले चौराहे पर फूंका पुतला, फिर DM ऑफिस तक पहुंचा हुजूम; कानपुर में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस का हल्लाबोल

जिलाधिकारी को सौंपा पत्रक

प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी को दिए पत्रक में मांग की कि ददरी खुर्द में पावर प्लांट के लिए इस्तेमाल की जा रही जमीन की राजस्व स्तर पर जांच कराई जाए। संगठन ने सरकारी जमीन के संबंध में लगाए गए आरोपों की जांच के लिए निष्पक्ष कमेटी गठित करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान करणी सेना के साथ अधिवक्ता, स्थानीय नागरिक और प्रभावित क्षेत्र के किसान-ग्रामीण भी मौजूद रहे।

जांच के बाद साफ होगी विवाद की तस्वीर

मीरजापुर के ददरी खुर्द में 1600 मेगावाट पावर प्लांट परियोजना को लेकर एक ओर निर्माण और ऊर्जा परियोजना से जुड़ी गतिविधियां आगे बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय जमीन, पर्यावरण और किसानों से जुड़े सवाल लगातार उठ रहे हैं। ऐसे में करीब 100 एकड़ सरकारी जमीन पर कथित कब्जे का आरोप अब प्रशासनिक जांच का विषय बन गया है।

Location :  Mirzapur

Published :  5 October 2026, 6:26 PM IST

Related News

Advertisement