Pratapgarh: गंगा में छोड़े गए एक लाख मत्स्य बीज, जैव विविधता बढ़ने के साथ मछुआरों की आजीविका को मिलेगा सहारा

गंगा की मुख्य धारा में एक लाख मत्स्य बीज क्यों छोड़े गए? प्रतापगढ़ के कालाकांकर घाट पर हुई इस पहल से नदी की जैव विविधता और स्थानीय मछुआरों की आजीविका को किस तरह फायदा मिलने की उम्मीद है? जानिए पूरी खबर।

Post Published By: Pratibha Yadav
Updated : 30 October 2026, 8:47 PM IST
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Pratapgarh: उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में पतित पावनी गंगा नदी में जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और जैव विविधता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक बेहद महत्वपूर्ण पहल की गई है। जनपद के ऐतिहासिक कालाकांकर घाट पर मत्स्य विभाग द्वारा आयोजित 'रिवर रैचिंग' कार्यक्रम के तहत गंगा की मुख्य धारा में एक लाख उन्नत प्रजाति के मत्स्य बीज छोड़े गए। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

पूर्व सांसद रत्ना सिंह ने अभियान को सराहा

यह गरिमामयी कार्यक्रम पूर्व सांसद राजकुमारी रत्ना सिंह की गरिमामयी मौजूदगी में संपन्न हुआ। उन्होंने स्वयं मत्स्य बीजों को गंगा नदी में प्रवाहित कर इस अभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने मत्स्य विभाग की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि गंगा नदी में मत्स्य बीज संचय करने से न सिर्फ नदी साफ-सुथरी रहेगी, बल्कि यह गंगा की प्राकृतिक जैव विविधता को बनाए रखने और उसे नया जीवन देने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।

मत्स्य विभाग द्वारा आयोजित 'रिवर रैचिंग' कार्यक्रम का आयोजन (Img: Dynamite News)

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वैज्ञानिक तकनीक से हुआ रिवर रैचिंग का कार्य

मत्स्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत 80 से 100 मिलीमीटर (एमएम) आकार के पूरी तरह स्वस्थ और सक्रिय एक लाख मत्स्य बीज गंगा में छोड़े गए हैं। इस आकार के बीजों के नदी में जीवित रहने और तेजी से बढ़ने की संभावना सबसे अधिक होती है। इस वैज्ञानिक पद्धति (रिवर रैचिंग) से नदी में मछलियों की लुप्त हो रही प्रजातियों का संरक्षण होगा और पर्यावरण का संतुलन भी बना रहेगा। 

मछुआरों की आजीविका को मिलेगा बड़ा सहारा

कार्यक्रम में मौजूद उप जिलाधिकारी (एसडीएम) कुंडा अजय यादव ने इस अभियान के आर्थिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से बताया कि इस दूरगामी पहल से आने वाले समय में नदी में प्राकृतिक रूप से मछलियों का उत्पादन काफी बढ़ जाएगा। इसका सीधा लाभ गंगा तटीय इलाकों में रहने वाले स्थानीय मछुआरा समुदाय को मिलेगा, जिनकी आजीविका पूरी तरह नदी पर निर्भर है। मछली उत्पादन बढ़ने से उनकी आर्थिक स्थिति में व्यापक सुधार होगा।

गंगा में छोड़े गए एक लाख मत्स्य बीज (Img: Dynamite News)

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प्रशासनिक अमला और स्थानीय लोग रहे मौजूद

कालाकांकर घाट पर आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान मत्स्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, क्षेत्रीय मुख्य विकास अधिकारी के प्रतिनिधि, स्थानीय ग्राम प्रधान, कई अन्य जनप्रतिनिधि तथा भारी संख्या में क्षेत्रीय नाविक व ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने गंगा को स्वच्छ रखने और इस मत्स्य संरक्षण अभियान को सफल बनाने का संकल्प लिया।

Location :  Pratapgarh

Published :  30 October 2026, 8:47 PM IST

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