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गोरखपुर के बड़हलगंज क्षेत्र में दबंगों के हमले और पुलिस की कथित निष्क्रियता को लेकर पीड़िता ने प्रेस क्लब में पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए, जिससे कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
मदद मांगने पत्रकारों के सामने आया पीड़ित परिवार
गोरखपुर के बड़हलगंज इलाके में दबंगई और सिस्टम की सुस्ती की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। लाठी-डंडों से जानलेवा हमला, खून से लथपथ पीड़ित और महीनों बाद भी आज़ाद घूमते आरोपी। यही नहीं, पीड़िता का आरोप है कि पुलिस आंखें मूंदे बैठी है और दबंगों को खुला संरक्षण मिल रहा है।
थाना बड़हलगंज का मामला
थाना बड़हलगंज क्षेत्र के ग्राम रजौरी की रहने वाली सुशीला साहनी ने गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता कर पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि 25 जनवरी 2026 को गांव के ही दबंगों ने उनके पति और बेटे अजय पर जान से मारने की नीयत से हमला कर दिया। हमलावरों ने लाठी-डंडों से हमला किया, जिसमें उनके बेटे के सिर में गंभीर चोट आई और दोनों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
नामजद आरोपी फिर भी गिरफ्तारी नहीं
पीड़िता के अनुसार इस हमले में देव प्रकाश शुक्ला, गणनायक शुक्ला, धर्मदेव यादव, मिठाई लाल यादव और उनके अन्य साथी शामिल थे। थाना बड़हलगंज में मुकदमा दर्ज होने के बावजूद अब तक एक भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। इससे साफ है कि या तो पुलिस दबाव में है या फिर जानबूझकर कार्रवाई से बच रही है।
पुलिस पर सांठगांठ के आरोप
सुशीला साहनी ने खुलकर आरोप लगाया कि पुलिस आरोपियों से मिली हुई है और मुकदमे को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि आरोपियों की तरफ से रिश्वत लेकर मामले को खत्म कराने का दबाव बनाया जा रहा है। गिरफ्तारी न होने से आरोपियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे खुलेआम उनके परिवार को जान से मारने की धमकी दे रहे हैं।
न्याय की गुहार, फिर भी सन्नाटा
पीड़िता ने बताया कि उन्होंने थाने से लेकर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों और मुख्यमंत्री कार्यालय तक शिकायत की, लेकिन कहीं से भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि प्रशासन की चुप्पी यह साबित करती है कि दबंगों को संरक्षण दिया जा रहा है।
आंदोलन की चेतावनी
सुशीला साहनी ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई और उनके परिवार को सुरक्षा नहीं दी गई, तो किसी भी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसी स्थिति में पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो वे न्याय के लिए आंदोलन का रास्ता अपनाएंगी।
पत्रकारों ने भी उठाए सवाल
प्रेस वार्ता के दौरान मौजूद पत्रकारों ने भी पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए और निष्पक्ष जांच की मांग की। पत्रकारों का कहना था कि यदि पीड़ित पक्ष के आरोप सही हैं, तो यह सीधे तौर पर कानून-व्यवस्था की विफलता है। अब देखना यह है कि पुलिस कब तक चुप रहती है या फिर कार्रवाई कर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाती है।