‘सुप्रीम कोर्ट कुछ भी कहे, पुलिस अपनी मनमर्जी करती है’ इलाहाबाद हाईकोर्ट की इस मामले में कड़ी फटकार से मचा हड़कंप

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने नाबालिग की कथित अवैध गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत के मामले में पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया पर कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने गिरफ्तारी संबंधी सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों की अनदेखी पर नाराजगी जताते हुए जांच अधिकारी को तलब किया और संबंधित मजिस्ट्रेट से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 4 July 2026, 8:01 PM IST

Lucknow : नाबालिग की कथित अवैध गिरफ्तारी के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने पुलिस तंत्र और न्यायिक प्रक्रिया पर कड़ा रुख अपनाया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने गिरफ्तारी से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों की अनदेखी पर गंभीर नाराजगी जताई और मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस अधिकारियों को कानून पढ़ने और समझने से कोई मतलब नहीं है। वे अपनी मर्जी से काम करते हैं। अदालत ने मामले में संबंधित जांच अधिकारी को तलब करने के साथ ही रिमांड मंजूर करने वाले न्यायिक मजिस्ट्रेट से भी व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है।

नाबालिग की गिरफ्तारी पर उठे सवाल

मामला एक नाबालिग से जुड़ा है। जिसे चोरी के आरोप में गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि एफआईआर दर्ज होने के समय आरोपी की उम्र 17 वर्ष से कम होने के बावजूद इस तथ्य पर ध्यान नहीं दिया गया। अदालत ने यह भी कहा कि जिन धाराओं में मामला दर्ज था, उनमें अधिकतम तीन और पांच वर्ष की सजा का प्रावधान है, ऐसे मामलों में गिरफ्तारी से पहले भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत नोटिस जारी करना आवश्यक है।

पुलिस और मजिस्ट्रेट दोनों पर सवाल

सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से दलील दी गई कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहा था। इसलिए गिरफ्तारी की गई। इस पर कोर्ट ने पूछा कि बिना कोई नोटिस दिए पुलिस उसी दिन यह निष्कर्ष कैसे निकाल सकती है कि आरोपी सहयोग नहीं कर रहा था। अदालत ने यह भी कहा कि यदि मजिस्ट्रेट ने आरोपी की उम्र की पुष्टि कर ली होती या केस डायरी का सही तरीके से अवलोकन किया होता, तो नाबालिग को न्यायिक हिरासत में नहीं भेजा जाता।

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हाईकोर्ट ने दी सख्त चेतावनी

पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के अर्नेश कुमार और सतेंद्र अंतिल जैसे महत्वपूर्ण फैसलों के बावजूद यदि गिरफ्तारी के नियमों का पालन नहीं किया जाता है, तो यह बेहद गंभीर मामला है। अदालत ने जांच अधिकारी को चेतावनी दी कि इस लापरवाही के लिए उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी हो सकती है। साथ ही मजिस्ट्रेट के हलफनामे में बिना शर्त माफी की बजाय अपने फैसले को सही ठहराने पर भी कोर्ट ने नाराजगी जताई।

16 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने पुलिस और संबंधित न्यायिक अधिकारी से विस्तृत जवाब तलब करते हुए मामले की अगली सुनवाई 16 जुलाई तय की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो मामले में सख्त आदेश पारित किए जाएंगे।

Location :  Lucknow

Published :  4 July 2026, 8:01 PM IST