नोएडा में मौत के गड्ढे! 7 महीने में तीन जानें गईं, जिम्मेदारों पर अब तक नहीं हुई कार्रवाई

नोएडा में कुछ महीनों के भीतर हुई घटनाओं ने लोगों की चिंता कई गुना बढ़ा दी है। हर बार जांच और कार्रवाई की बातें हुईं, लेकिन सवाल अब भी कायम हैं। आखिर ऐसा क्या है जो लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है? पूरी रिपोर्ट पढ़कर जानिए।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 13 July 2026, 11:14 AM IST

Noida: नोएडा-ग्रेटर नोएडा शहर में खुले गड्ढे और बिना सुरक्षा इंतजाम वाले नाले लोगों की जान के दुश्मन बनते जा रहे हैं। वर्ष 2026 के पहले सात महीनों में ऐसे ही हादसों में दो इंजीनियरों और एक छात्र की मौत हो चुकी है। हर घटना के बाद जिम्मेदार विभागों पर लापरवाही के आरोप लगे, जांच के आदेश भी दिए गए, लेकिन अब तक किसी अधिकारी पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लगातार हो रहे हादसों ने नोएडा प्राधिकरण, जिला प्रशासन, पुलिस और अन्य संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

तीन हादसों ने खोली सिस्टम की पोल

इन तीनों घटनाओं में एक बात समान रही कि जहां हादसा हुआ, वहां पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर निर्माण स्थलों पर समय रहते बैरिकेडिंग कर दी जाती, जलभराव वाले गड्ढों को सुरक्षित किया जाता और हादसे के बाद तुरंत रेस्क्यू अभियान चलाया जाता, तो शायद तीनों लोगों की जान बचाई जा सकती थी। इसके बावजूद किसी भी मामले में स्पष्ट जवाबदेही तय नहीं हो सकी।

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एमिटी छात्र हर्षित भट्ट की मौत पर भी नहीं हुई कार्रवाई

आठ अप्रैल को सेक्टर-94 में पानी से भरे गड्ढे में डूबने से एमिटी विश्वविद्यालय के छात्र हर्षित भट्ट की मौत हो गई थी। घटना के बाद नोएडा प्राधिकरण ने यूपी राजकीय निर्माण निगम से केवल स्पष्टीकरण मांगा, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। परिजनों और लोगों ने इस मामले में कई बार जवाबदेही तय करने की मांग उठाई।

इंजीनियर आर्यन प्रजापति केस में भी सवाल बरकरार

नौ जुलाई को सेक्टर-58 में इंजीनियर आर्यन प्रजापति की नाले में गिरकर मौत हो गई। इस मामले में भी प्राधिकरण और बिजली विभाग अपनी लापरवाही से इनकार करते रहे। हालांकि सामने आए सीसीटीवी फुटेज में आर्यन को गिरने से पहले करंट जैसा झटका लगने की आशंका दिखाई दी। इसके बावजूद जांच अभी तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची और किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।

युवराज मेहता केस में एसआईटी रिपोर्ट का इंतजार

इससे पहले 16 जनवरी 2026 को सेक्टर-150 में निर्माणाधीन बेसमेंट के लिए खोदे गए गहरे गड्ढे में डूबने से सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हो गई थी। मामले ने पूरे प्रदेश में सुर्खियां बटोरी थीं। मुख्यमंत्री के निर्देश पर एसआईटी गठित की गई और तत्कालीन नोएडा सीईओ को भी हटाया गया, लेकिन करीब छह महीने बाद भी एसआईटी की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई। न ही किसी अधिकारी की जिम्मेदारी तय की गई।

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लोग बोले- हादसे नहीं, लापरवाही से हो रही मौतें

लगातार हो रही इन घटनाओं के बाद शहर के लोगों में नाराजगी है। उनका कहना है कि विकास कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है। लोगों का मानना है कि जब तक जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी और निर्माण स्थलों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए जाएंगे, तब तक ऐसे हादसे रुकने वाले नहीं हैं।

Location :  Noida

Published :  13 July 2026, 11:14 AM IST