युवराज मेहता की मौत ने यह साफ कर दिया है कि समय पर प्लानिंग, मॉनिटरिंग और रेस्क्यू होता तो एक जान बचाई जा सकती थी। अब यह मामला सिस्टम की जवाबदेही का बड़ा टेस्ट बन चुका है।

सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता का फाइल फोटो
Noida: सेक्टर-150 में इंजीनियर युवराज मेहता की कार डूबने से हुई मौत अब सिर्फ एक दर्दनाक हादसा नहीं रह गई है, बल्कि सिस्टम की गंभीर नाकामी की कहानी बनकर सामने आई है। इस मामले में गठित विशेष जांच टीम यानी SIT ने अपनी अंतिम रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दी है। सात दिन तक चली गहन जांच, सैकड़ों फाइलों की पड़ताल और दर्जनों अधिकारियों से पूछताछ के बाद तैयार यह रिपोर्ट प्रशासनिक व्यवस्था की परत-दर-परत पोल खोलती नजर आ रही है। रिपोर्ट सामने आते ही बड़े स्तर पर सख्त कार्रवाई के संकेत मिलने लगे हैं।
600 पेज की रिपोर्ट, हर फाइल खंगाली
एसआईटी जांच के दौरान नोएडा प्राधिकरण, पुलिस और जिला प्रशासन की ओर से करीब 600 पन्नों का लिखित रिकॉर्ड जुटाया गया। इनमें जलभराव से जुड़ी पूर्व चेतावनियां, स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज प्लान, कंट्रोल रूम की कार्यप्रणाली, ड्यूटी रोस्टर, कॉल रिकॉर्ड, रेस्क्यू रिस्पॉन्स टाइम और मौके पर तैनात अधिकारियों की जिम्मेदारियों का पूरा ब्योरा शामिल था। टीम ने हर दस्तावेज को क्रॉस-वेरिफाई कर रिपोर्ट का हिस्सा बनाया, जिससे किसी भी स्तर पर तथ्य छूट न जाए।
रेस्क्यू में दो घंटे की देरी ने छीनी जान
जांच में सबसे बड़ा सवाल यही उभरकर सामने आया कि युवराज को कार से बाहर निकालने में करीब दो घंटे का वक्त क्यों लग गया। एसआईटी ने पाया कि हादसे के बाद शुरुआती समय में रेस्क्यू सिस्टम पूरी तरह सक्रिय ही नहीं हुआ। एसडीआरएफ, पुलिस और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय की भारी कमी दिखी। कंट्रोल रूम से समय पर स्पष्ट निर्देश नहीं दिए गए और मौके पर मौजूद टीमें हालात की गंभीरता को समझने में नाकाम रहीं।
कागजों में प्लान, सड़क पर पानी
रिपोर्ट में यह भी साफ हुआ कि जिस प्लॉट में हादसा हुआ, वहां जल निकासी की स्थायी योजना पहले से प्रस्तावित थी, लेकिन वह सिर्फ फाइलों तक सीमित रही। प्लॉट आवंटन से लेकर हादसे वाले दिन तक ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त करने के लिए कोई ठोस काम नहीं किया गया। एसआईटी ने उस दौरान तैनात वरिष्ठ अधिकारियों, जूनियर इंजीनियरों और संबंधित विभागों की भूमिका को सीधे जांच के घेरे में लिया है।
नाम तय, अब फैसला सीएम करेंगे
सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी रिपोर्ट में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम स्पष्ट रूप से दर्ज हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद इसका अध्ययन करेंगे। माना जा रहा है कि दोषियों पर निलंबन, विभागीय कार्रवाई और आपराधिक मुकदमे तक के निर्देश दिए जा सकते हैं।
सिस्टम के कटघरे में युवराज की मौत
युवराज मेहता की मौत ने यह साफ कर दिया है कि समय पर प्लानिंग, मॉनिटरिंग और रेस्क्यू होता तो एक जान बचाई जा सकती थी। अब यह मामला सिस्टम की जवाबदेही का बड़ा टेस्ट बन चुका है।