
सपनों की जंग में हारती युवा जिंदगियां ((Img- Pinterest)
Hamirpur: देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक 'नीट' (NEET) की तैयारी कर रहे युवाओं पर सफल होने का दबाव इस कदर हावी हो रहा है कि वे अपनी जान तक गंवाने को मजबूर हैं। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले से सामने आया ताजा मामला हर किसी का दिल दहला देने वाला है। यहां राठ कस्बे की रहने वाली 20 वर्षीय श्रुति साहू ने नीट परीक्षा में उम्मीद के मुताबिक अंक न मिलने के बाद यह खौफनाक कदम उठा लिया।
श्रुति के परिजनों के अनुसार, वह बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना देख रही थी और इसके लिए उसने कानपुर में रहकर दिन-रात एक कर मेहनत की थी। दो महीने पहले ही वह घर लौटी थी। जब परीक्षा का परिणाम आया और उसे सफलता नहीं मिली, तो वह गहरे तनाव में चली गई। इसी निराशा के चलते उसने शनिवार रात घर में रखा कीटनाशक खा लिया। गंभीर हालत में उसे उरई के मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
यह दुखद घटना केवल हमीरपुर तक सीमित नहीं है। पिछले कुछ ही महीनों में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग शहरों से छात्रों द्वारा आत्महत्या के मामले सामने आ चुके हैं। गाजियाबाद में 22 साल के एक छात्र ने और लखनऊ में 17 साल की छात्रा ने परीक्षा के तनाव व असमंजस के कारण अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली थी। ये घटनाएं दर्शाती हैं कि परीक्षाओं का मानसिक दबाव छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर कितना बुरा असर डाल रहा है।
छात्रों की लगातार हो रही मौतों ने समाज, अभिभावकों और कोचिंग संस्थानों के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी परीक्षा का परिणाम किसी इंसान की जिंदगी और काबिलियत का अंतिम फैसला नहीं हो सकता। परिजनों को बच्चों पर अत्यधिक दबाव बनाने के बजाय उनकी मानसिक स्थिति को समझना होगा, ताकि फिर किसी श्रुति का सपना और जिंदगी अधूरी न रहे।
Location : Hamirpur
Published : 21 July 2026, 8:48 AM IST
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