Mirzapur: 15 साल बाद भी अधूरी कांशीराम आवासीय कॉलोनी, न पानी की टंकी बनी, न गरीबों को मिला पूरा आशियाना

मिर्जापुर के नादाना गांव में वर्ष 2011 में शुरू हुई कांशीराम आवासीय कॉलोनी का निर्माण 15 साल बाद भी अधूरा है। ग्रामीणों के अनुसार, कई आवासों पर छत नहीं है और पेयजल के लिए बनी पाइपलाइन के बावजूद पानी की टंकी अधूरी है। जानिए, सरकारी परियोजना की मौजूदा स्थिति और उठ रहे सवाल।

Post Published By: Ramdev Gupta
Updated : 16 October 2026, 1:24 PM IST
google-preferred

Mirzapur: सरकारी योजनाओं का उद्देश्य गरीबों को आवास, बुनियादी सुविधाएं और बेहतर जीवन देना है, लेकिन जब विकास के नाम पर शुरू हुए काम वर्षों तक अधूरे पड़े रहें, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। मिर्जापुर जिले की ग्राम सभा नादाना में वर्ष 2011 में नक्सल प्रभावित क्षेत्र के आदिवासी और अनुसूचित जाति के परिवारों के लिए शुरू की गई कांशीराम आवासीय कॉलोनी आज भी अधूरे निर्माण और बुनियादी सुविधाओं की कमी की कहानी बयां कर रही है। ग्रामीणों के मुताबिक, कई आवासों की छत तक नहीं बनी, जबकि पेयजल के लिए बिछाई गई पाइपलाइन के बावजूद पानी की टंकी का निर्माण अधूरा है।

24 जून 2011 को हुआ था शिलान्यास

मिली जानकारी के अनुसार, 24 जून 2011 को तत्कालीन जिलाधिकारी संयुक्ता समुददार और आईपीएस अधिकारी के. सत्यनारायण की मौजूदगी में इस आवासीय परियोजना का शिलान्यास किया गया था। इसका उद्देश्य नक्सल प्रभावित इलाकों में दूर-दराज रहने वाले आदिवासी और अनुसूचित जाति के परिवारों को एक स्थान पर बसाकर उन्हें सुरक्षित आवास और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना था।

परियोजना के तहत कुछ आवासों का निर्माण शुरू हुआ, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि कई मकान आज भी अधूरे हैं। कुछ आवासों पर छत नहीं है और कुछ निर्माण ऐसे हैं, जिनका इस्तेमाल करना संभव नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि गरीब परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई योजना आखिर अब तक पूरी क्यों नहीं हो सकी?

यह भी पढ़ें: World Food Day 2026: दुनिया में 64.5 करोड़ लोग भूख से परेशान, पौष्टिक भोजन तक पहुंच आज भी बड़ी चुनौती

पाइपलाइन बिछी, लेकिन पानी की टंकी का इंतजार

नादाना ग्राम सभा का इलाका पहाड़ी और दुर्गम बताया जाता है। यहां पेयजल की समस्या लंबे समय से चुनौती बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार, पानी की आपूर्ति के लिए पाइपलाइन बिछाई गई, लेकिन पानी की टंकी का निर्माण नहीं हो सका। नतीजतन, पानी की व्यवस्था को लेकर लोगों की परेशानियां बनी हुई हैं।

गांव तक पहुंचने के लिए जंगल के बीच से कच्चे रास्ते से गुजरना पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्र की दुर्गमता के कारण आवागमन और सरकारी सुविधाओं तक पहुंच भी मुश्किल बताई जाती है।

स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए भी लंबी दूरी

ग्रामीणों के अनुसार, गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) की व्यवस्था होने के बावजूद लोगों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। गंभीर बीमारी या बेहतर इलाज की जरूरत पड़ने पर उन्हें हलिया क्षेत्र जाना पड़ता है, जो गांव से लगभग 15 से 20 किलोमीटर दूर बताया जाता है।

ऐसे में सवाल सिर्फ अधूरे मकानों का नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, पेयजल और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी है। आखिर दुर्गम क्षेत्र में रहने वाले गरीब परिवारों को योजनाओं का पूरा लाभ कब मिलेगा?

यह भी पढ़ें: Ballia: नाबालिग को भगाने के मामले में 5 दोषियों पर चला कानून का डंडा

निर्माण कार्य और सरकारी धन पर उठ रहे सवाल

ग्रामीणों की शिकायतों के बीच आवासीय परियोजना के निर्माण, गुणवत्ता, भुगतान और कार्य पूर्ण होने से संबंधित अभिलेखों की जांच जरूरी है। यदि किसी निर्माण को अधूरा छोड़ने के बावजूद पूर्ण दिखाकर भुगतान किया गया है, तो यह गंभीर अनियमितता का मामला हो सकता है। हालांकि, इसकी पुष्टि संबंधित विभागीय रिकॉर्ड, भुगतान विवरण और तकनीकी जांच के बाद ही हो सकती है।

स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों ने कथित तौर पर ठेकेदार और प्रभावशाली व्यक्तियों के संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। कुछ ग्रामीणों ने पहचान उजागर न करने की इच्छा जताई है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए संबंधित ठेकेदार, अधिकारियों और विभाग का पक्ष सामने आना भी जरूरी है।

2011 से 2026 तक अधूरा विकास, जवाबदेह कौन?

ग्रामीणों के मुताबिक, परियोजना के शिलान्यास को करीब 15 साल बीत चुके हैं, लेकिन आवासीय कॉलोनी पूरी नहीं हो सकी। परियोजना स्थल पर लगा शिलापट्ट आज भी इस योजना की शुरुआत की याद दिलाता है। दूसरी ओर, स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित विभागों से जानकारी मांगने पर उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिल पा रहा है।

इस मामले में कई अहम सवालों के जवाब मिलना बाकी हैं। परियोजना के लिए कुल कितनी धनराशि स्वीकृत हुई थी? कितना पैसा जारी और खर्च किया गया? कितने आवास स्वीकृत हुए और कितने पूरे हुए? निर्माण कार्य की निगरानी किस अभियंता ने की? यदि काम अधूरा है, तो भुगतान और उपयोगिता प्रमाणपत्रों की स्थिति क्या है?

इन सवालों के जवाब संबंधित विभागों के रिकॉर्ड और आधिकारिक जांच से ही सामने आ सकते हैं।

यह भी पढ़ें: बलिया कोर्ट का बड़ा एक्शन: 23 साल पुराने कोतवाल बदतमीजी मामले में मंत्री दयाशंकर सिंह पर गिरफ्तारी वारंट जारी

गरीबों के हक का पैसा, लेकिन कार्रवाई कब?

सरकारी योजनाओं का उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना है। लेकिन यदि वर्षों बाद भी आवास अधूरे हों, पेयजल की व्यवस्था शुरू न हुई हो और ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़े, तो जवाबदेही तय करना जरूरी हो जाता है।

अब जरूरत है कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग नादाना ग्राम सभा की आवासीय परियोजना की स्थिति स्पष्ट करें, निर्माण और भुगतान का ऑडिट कराएं तथा अनियमितता मिलने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करें। साथ ही, अधूरे आवासों और पेयजल व्यवस्था को पूरा करने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाई जाए।

सबसे बड़ा सवाल यही है—वर्ष 2011 में जिस योजना से गरीब परिवारों को सुरक्षित आशियाना देने का सपना दिखाया गया था, वह वर्ष 2026 तक पूरा क्यों नहीं हुआ? और नादाना के ग्रामीणों को अपने हक की सुविधाएं आखिर कब मिलेंगी?

Location :  Mirzapur

Published :  16 October 2026, 1:24 PM IST

Related News

Advertisement