World Food Day 2026: दुनिया में 64.5 करोड़ लोग भूख से परेशान, पौष्टिक भोजन तक पहुंच आज भी बड़ी चुनौती

दुनिया में खाद्य उत्पादन बढ़ने और आधुनिक तकनीक के विकास के बावजूद भूख, कुपोषण और पौष्टिक भोजन की उपलब्धता से जुड़ी समस्याएं खत्म नहीं हुई हैं। हर साल 16 अक्टूबर को मनाया जाने वाला विश्व खाद्य दिवस इसी चुनौती की ओर दुनिया का ध्यान आकर्षित करता है।

Post Published By: Ramdev Gupta
Updated : 16 October 2026, 12:07 PM IST
google-preferred

New Delhi: थाली में रखा खाना किसी के लिए रोजमर्रा की जरूरत है, तो किसी के लिए आज भी एक बड़ी चुनौती। दुनिया में खाद्य उत्पादन बढ़ने और आधुनिक तकनीक के विकास के बावजूद भूख, कुपोषण और पौष्टिक भोजन की उपलब्धता से जुड़ी समस्याएं खत्म नहीं हुई हैं। हर साल 16 अक्टूबर को मनाया जाने वाला विश्व खाद्य दिवस इसी चुनौती की ओर दुनिया का ध्यान आकर्षित करता है।

विश्व खाद्य दिवस 2026 की थीम “Innovate today. Nourish tomorrow” यानी आज नवाचार करें, कल पोषण सुनिश्चित करें है। इसका उद्देश्य आधुनिक तकनीक, पारंपरिक ज्ञान और समावेशी समाधानों के जरिए खाद्य व्यवस्था को बेहतर बनाना और आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्याप्त, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन सुनिश्चित करना है।

दुनिया में करोड़ों लोग आज भी भूख का सामना कर रहे

संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) और अन्य एजेंसियों की जुलाई 2026 में जारी रिपोर्ट The State of Food Security and Nutrition in the World 2026 के मुताबिक, वर्ष 2025 में दुनिया की लगभग 64.5 करोड़ आबादी यानी 7.8 प्रतिशत लोग भूख से प्रभावित थे। वहीं, करीब 2.1 अरब लोगों को मध्यम या गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना करना पड़ा। इसका अर्थ है कि इन लोगों को पर्याप्त भोजन नियमित रूप से उपलब्ध नहीं था या उन्हें भोजन की मात्रा और गुणवत्ता से समझौता करना पड़ा।

रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में लगभग 270 करोड़ लोग स्वस्थ और पौष्टिक आहार का खर्च वहन नहीं कर पा रहे हैं। इससे स्पष्ट होता है कि समस्या केवल भोजन की उपलब्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों की आर्थिक स्थिति और पौष्टिक भोजन की कीमतें भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

दिवाली से पहले बड़ी सौगात: गुजरात में पाकिस्तान से आए 319 शरणार्थियों को मिली भारतीय नागरिकता, चेहरों पर लौटी मुस्कान

युद्ध, जलवायु परिवर्तन और महंगाई ने बढ़ाईं चुनौतियां

रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे अंतरराष्ट्रीय संघर्षों ने वैश्विक कृषि आपूर्ति और खाद्य बाजार की कमजोरियों को उजागर किया है। अनाज और खाद्य तेल के निर्यात में बाधाएं आने से अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। दूसरी ओर, सूखा, बाढ़, अनियमित बारिश और बढ़ता तापमान कृषि उत्पादन को प्रभावित करते हैं।

इन परिस्थितियों का असर केवल किसानों तक सीमित नहीं रहता। उत्पादन लागत बढ़ने और आपूर्ति बाधित होने पर खाद्य पदार्थ महंगे हो सकते हैं, जिससे कम आय वाले परिवारों के लिए पौष्टिक भोजन खरीदना मुश्किल हो जाता है।

Google Maps से रेकी, 15 मिनट में 5 करोड़ की लूट; सिंगरौली बैंक डकैती में बड़ा खुलासा

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है विश्व खाद्य दिवस?

भारत जैसे बड़ी आबादी वाले देश में खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ पोषण की गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है। पर्याप्त अनाज उपलब्ध होने के बावजूद संतुलित आहार, प्रोटीन, फल, सब्जियां और अन्य पोषक तत्वों तक पहुंच पर ध्यान देना जरूरी है।

इसके लिए किसानों को आधुनिक तकनीक और बेहतर सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध कराना, फसल भंडारण और परिवहन व्यवस्था मजबूत करना तथा खाद्य पदार्थों की बर्बादी रोकना अहम कदम हैं। साथ ही, जरूरतमंद परिवारों तक खाद्यान्न पहुंचाने और पौष्टिक भोजन को किफायती बनाने के प्रयास भी जरूरी हैं।

विश्व खाद्य दिवस का संदेश साफ है—भविष्य की खाद्य सुरक्षा केवल अधिक अनाज उगाने से सुनिश्चित नहीं होगी। इसके लिए ऐसी व्यवस्था बनानी होगी, जिसमें हर व्यक्ति को पर्याप्त, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन मिल सके।

Location :  New Delhi

Published :  16 October 2026, 12:07 PM IST

Related News

No related posts found.

Advertisement