हाईकोर्ट से मिली जमानत, चेहरे पर लौटी रंगत; मेरठ में रह रही पाकिस्तानी महिला सबा मसूद को मिली बड़ी राहत

मेरठ में 35 वर्षों से रह रहीं पाकिस्तानी नागरिक सबा मसूद को इलाहाबाद हाईकोर्ट से फर्जी दस्तावेज मामले में जमानत मिल गई। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया ठोस साक्ष्य नहीं मिलने, वैध वीजा, रेजिडेंशियल परमिट और लंबी अवधि के वैध निवास को राहत का आधार माना।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 7 August 2026, 6:59 PM IST

Meerut: हाबाद हाईकोर्ट ने करीब 35 वर्षों से भारत में रह रहीं पाकिस्तानी नागरिक सबा मसूद को फर्जी दस्तावेज और वोटर आईडी से जुड़े मामले में जमानत दे दी है। मेरठ के जलीकोठी निवासी सबा मसूद को दिल्ली गेट थाना पुलिस ने 16 फरवरी 2026 को गिरफ्तार किया था। अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड और प्रथम दृष्टया साक्ष्यों के आधार पर उन्हें राहत प्रदान की।

हाईकोर्ट ने साक्ष्यों को माना अपर्याप्त

न्यायमूर्ति कृष्ण पहल की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा कोई ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया जिससे यह साबित हो कि याची ने भारत में रहने के लिए धोखाधड़ी, जालसाजी या फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। अदालत ने कहा कि मामले की सुनवाई जारी रहेगी, लेकिन फिलहाल जमानत देने से इनकार करने का पर्याप्त आधार नहीं है।

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शिकायत में लगाए गए थे गंभीर आरोप

यह मामला मेरठ के देहली गेट थाने में दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है। शिकायतकर्ता रुखसाना खान ने आरोप लगाया था कि सबा मसूद पाकिस्तान की नागरिक हैं और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारत में अवैध रूप से रह रही हैं। शिकायत में उनके परिवार पर संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े आरोप भी लगाए गए थे।

1986 में भारतीय नागरिक से किया था निकाह

याची की ओर से अदालत को बताया गया कि विवाह से पहले सबा मसूद की पहचान शबा हनीफ के नाम से थी। उन्होंने वर्ष 1986 में लाहौर में भारतीय नागरिक फरहत मसूद से निकाह किया था। इसके बाद वह वैध पाकिस्तानी पासपोर्ट और भारतीय अधिकारियों द्वारा जारी दीर्घकालिक वीजा पर भारत आईं और तब से लगातार यहीं रह रही हैं।

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वैध वीजा और नागरिकता आवेदन का दिया हवाला

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि सबा मसूद के पास मार्च 2027 तक वैध रेजिडेंशियल परमिट और वर्ष 2037 तक वैध वीजा है। इसके अलावा उन्होंने वर्ष 2010 और 2011 में भारतीय नागरिकता के लिए विधिवत आवेदन किया था, जो अभी विचाराधीन है। राज्य सरकार ने वीजा नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए जमानत का विरोध किया, लेकिन अदालत ने लंबे समय से वैध निवास, आपराधिक इतिहास न होने और अभियोजन पक्ष की ओर से ठोस साक्ष्य प्रस्तुत न किए जाने को देखते हुए जमानत मंजूर कर ली।

Location :  Meerut

Published :  7 August 2026, 6:59 PM IST