एटा में CDO नागेंद्र नारायण मिश्रा का कथित रिश्वत मांगने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बड़ा प्रशासनिक एक्शन हुआ है। हर आंगनबाड़ी से 10 हजार रुपये की मांग के आरोप के बीच सरकार ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

वायरल वीडियो के बाद CDO पर गिरी गाज
Etah: एटा में एक वीडियो ने प्रशासनिक गलियारों में ऐसा तूफान खड़ा कर दिया कि पूरे जिले में हड़कंप मच गया। आरोप है कि एक वरिष्ठ अधिकारी आंगनबाड़ी केंद्रों से पैसे जुटाने की बात कर रहे थे और यह बातचीत कैमरे में कैद हो गई। वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया और मामला सीधे शासन तक पहुंच गया।
वीडियो के वायरल होने के बाद सरकार ने सख्त रुख अपनाया और कुछ ही घंटों के भीतर कार्रवाई भी हो गई। आरोपों के घेरे में आए एटा के मुख्य विकास अधिकारी नागेन्द्र नारायण मिश्र को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। इस फैसले ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को हिला कर रख दिया है।
यह मामला एटा जिले के विकास भवन से जुड़ा बताया जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में मुख्य विकास अधिकारी नागेंद्र नारायण मिश्रा कथित तौर पर डिस्ट्रिक्ट कॉर्डिनेटर संजीव पचौरी से बातचीत करते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो में दावा किया जा रहा है कि अधिकारी हर आंगनबाड़ी केंद्र से 10 हजार रुपये की व्यवस्था कराने की बात कर रहे थे। बताया जा रहा है कि इस बातचीत के दौरान डिस्ट्रिक्ट कॉर्डिनेटर संजीव पचौरी ने इस मांग को मानने से इनकार कर दिया था।
वायरल वीडियो कुछ ही घंटों में अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फैल गया। कई लोगों ने इसे शेयर करते हुए प्रशासन पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। लोगों का कहना था कि अगर यह वीडियो सही है तो यह बेहद गंभीर मामला है, क्योंकि आंगनबाड़ी जैसी योजनाएं सीधे गरीब और जरूरतमंद बच्चों तथा महिलाओं से जुड़ी होती हैं।
एटा विकास भवन में रिश्वत का आरोप, वीडियो सामने आते ही अधिकारी सस्पेंड@Uppolice @Etahpolice #Viralvideo pic.twitter.com/pAAPv61PU4
— डाइनामाइट न्यूज़ हिंदी (@DNHindi) March 10, 2026
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने तुरंत हस्तक्षेप किया। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के निर्देश पर मुख्य विकास अधिकारी नागेंद्र नारायण मिश्रा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। सरकारी सूत्रों के मुताबिक वीडियो की सत्यता और पूरे मामले की जांच भी शुरू कर दी गई है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
इस पूरे विवाद ने आंगनबाड़ी व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आंगनबाड़ी केंद्र महिलाओं और बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं में से एक हैं। ऐसे में अगर इन केंद्रों से पैसे जुटाने जैसी बातें सामने आती हैं तो यह सीधे तौर पर योजना की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करती हैं।
घटना के बाद विकास भवन एटा जिले में चर्चा का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। प्रशासनिक अधिकारियों के बीच भी इस मामले को लेकर बातचीत जारी है। कई लोग यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर यह वीडियो कब और कैसे रिकॉर्ड हुआ और इसमें दिखाई दे रही बातचीत का पूरा संदर्भ क्या है। फिलहाल प्रशासन ने साफ कर दिया है कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।