Maharajganj: सरकारी ऐप छोड़ क्लोन ऐप से हाजिरी का खेल? निचलौल के 6 गांवों में मनरेगा भुगतान की जांच से मचा हड़कंप

महराजगंज के निचलौल ब्लॉक में मनरेगा भुगतान को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने विभागीय व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब छह गांवों में मजदूरों की ऑनलाइन हाजिरी और भुगतान रिकॉर्ड की जांच की जरूरत महसूस की जा रही है।

Maharajganj News: मनरेगा में मजदूरों की ऑनलाइन हाजिरी और भुगतान की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लागू व्यवस्था पर अब कथित क्लोन ऐप के इस्तेमाल की आशंका के चलते सवाल उठ रहे हैं। महराजगंज जिले के निचलौल ब्लॉक के करीब आधा दर्जन गांवों में हुए भुगतान की जांच की जरूरत महसूस की जा रही है।

मामला सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर पड़ताल की जा रही है। उपायुक्त मनरेगा गौरवेंद्र सिंह ने इसे संदिग्ध मामला बताते हुए जांच जारी होने की जानकारी दी है।

सरकारी ऐप में दो बार हाजिरी

विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन की गारंटी (वीबी-जी राम जी) योजना के तहत मजदूरों की उपस्थिति नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (एनएमएमएस) ऐप के माध्यम से ऑनलाइन दर्ज की जाती है। इस व्यवस्था में दिन में दो बार हाजिरी दर्ज करने का प्रावधान है, ताकि कार्यस्थल पर मजदूरों की वास्तविक मौजूदगी सुनिश्चित की जा सके।

इसके विपरीत, कथित क्लोन ऐप के जरिए केवल एक बार हाजिरी दर्ज किए जाने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में दूसरी बार उपस्थिति दर्ज नहीं होने पर तकनीकी खराबी या नेटवर्क की समस्या का हवाला देकर भुगतान प्रक्रिया आगे बढ़ाए जाने की संभावना पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, निचलौल ब्लॉक में ऐसा होने की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

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मामले में सबसे गंभीर सवाल

ऑनलाइन हाजिरी के लिए इस्तेमाल की जाने वाली तस्वीरों को लेकर है। आरोप है कि सरकारी एनएमएमएस ऐप से मिलते-जुलते कथित क्लोन ऐप के माध्यम से मोबाइल में पहले से सुरक्षित तस्वीरों का इस्तेमाल कर सामूहिक रूप से मजदूरों की हाजिरी दर्ज की जा सकती है।

अगर जांच में ऐसा सामने आता है तो कार्यस्थल पर मजदूरों की वास्तविक मौजूदगी और ऑनलाइन दर्ज उपस्थिति के बीच अंतर की आशंका होगी। इससे मस्टर रोल की विश्वसनीयता और मजदूरी भुगतान की प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि संबंधित गांवों में हाजिरी के डिजिटल रिकॉर्ड और भुगतान विवरण का मिलान करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

एपीके फाइल और एक्सेस-की के इस्तेमाल पर सवाल

सूत्रों के अनुसार, कथित क्लोन ऐप के संचालन में एपीके फाइल और एक्सेस-की के इस्तेमाल की बात सामने आई है। एक्सेस-की उपलब्ध कराने के लिए 50 रुपये से लेकर लाखों रुपये तक की रकम के दावे भी किए जा रहे हैं। हालांकि, इन दावों और कथित नेटवर्क की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसके अलावा रोजगार सेवक से लेकर खंड विकास अधिकारी स्तर तक की लॉगिन आईडी और पासवर्ड के संभावित इस्तेमाल को लेकर भी सवाल हैं।

निचलौल के छह गांवों में भुगतान रिकॉर्ड की जांच जरूरी

निचलौल ब्लॉक के करीब आधा दर्जन गांवों में हुए भुगतान को लेकर पड़ताल की जरूरत बताई जा रही है। हालांकि, भुगतान हो जाना अपने आप में किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं है। वास्तविक स्थिति जानने के लिए संबंधित गांवों के मस्टर रोल, दोनों समय की हाजिरी, ऑनलाइन तस्वीरों, भुगतान रिकॉर्ड और डिजिटल लॉग का मिलान करना होगा।

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जांच में यह भी देखना होगा कि मजदूर वास्तव में कार्यस्थल पर मौजूद थे या नहीं, हाजिरी किस ऐप के माध्यम से दर्ज की गई और भुगतान की स्वीकृति किन रिकॉर्ड के आधार पर दी गई।

उपायुक्त मनरेगा बोले- संदिग्ध है मामला

उपायुक्त मनरेगा गौरवेंद्र सिंह ने बताया कि मामला संदिग्ध है और विभागीय स्तर पर जांच की जा रही है। बीडीओ और निचलौल ब्लॉक पर उच्चाधिकारियों की नजर बनी हुई है। जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

Location :  Maharajganj

Published :  14 October 2026, 6:42 PM IST

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