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महराजगंज के परतावल सामूहिक विवाह कार्यक्रम में वायरल वीडियो के बाद प्रशासन ने एपीओ दिलीप गौतम को अटैच किया। तीन सदस्यीय जांच कमेटी 3 दिन में रिपोर्ट देगी, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित होगी।
सामूहिक विवाह (Img- Internet)
Maharajganj: महराजगंज जिले के परतावल ब्लॉक में आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में हुए कथित घोटाले ने प्रशासन और समाज दोनों में हड़कंप मचा दिया। वायरल वीडियो में दिख रहा है कि दूल्हा-दुल्हन को दिए जाने वाले सामान को लेकर अनियमितता हुई। इसी को लेकर एपीओ दिलीप गौतम पर आरोप लगे।
मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) महेंद्र कुमार सिंह ने मामले को संज्ञान में लेते हुए तत्काल जांच के आदेश जारी किए और एपीओ को जिला मुख्यालय अटैच कर दिया।
डाइनामाइट न्यूज द्वारा इस मामले को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद वीडियो तेजी से वायरल हुआ। वायरल हुए वीडियो में दावा किया गया है कि कार्यक्रम के दौरान कुछ लोगों ने दूल्हा-दुल्हन का सामान लेकर भागने का प्रयास किया। वीडियो वायरल होते ही प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों और मीडिया ने भी मामले को प्रमुखता से उठाया।
इस घटना के बाद जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करने की मांग तेज हो गई। प्रशासन ने इसे गंभीर मानते हुए एपीओ की भूमिका की जांच के आदेश दिए।
मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) महेंद्र कुमार सिंह ने प्रारंभिक जांच में एपीओ दिलीप गौतम की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर उन्हें जिला मुख्यालय अटैच कर दिया। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि प्रशासन किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेगा।
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प्रशासन ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है। इसमें डीसी मनरेगा गौरवेंद्र कुमार सिंह को प्रमुख जांच अधिकारी बनाया गया है। उनके साथ परियोजना निदेशक रामदरश चौधरी और समाज कल्याण अधिकारी विपिन यादव शामिल हैं।
कमेटी को निर्देश दिया गया है कि वह तीन दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करे। रिपोर्ट में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी (एपीओ) दिलीप गौतम की भूमिका प्रारंभिक जांच में संदिग्ध पाई गई है। उनकी जिम्मेदारी इस मामले की निगरानी और कार्यक्रम के सुचारू संचालन की थी। वीडियो वायरल होने के बाद उनकी जिम्मेदारी की जांच और जवाबदेही तय करने के लिए प्रशासन ने यह कदम उठाया।
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यह मामला यह दर्शाता है कि सरकारी कार्यक्रमों में पारदर्शिता बनाए रखना कितना आवश्यक है। सामूहिक विवाह जैसे सामाजिक कार्यक्रमों में जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी और कार्यप्रणाली पर सतर्कता ही ऐसे विवादों को रोक सकती है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच निष्पक्ष होगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह कदम अन्य सरकारी कार्यक्रमों के लिए चेतावनी के रूप में भी देखा जा रहा है।