कौशांबी के मंझनपुर में निर्माणाधीन कान्हा गौशाला के निरीक्षण में जिलाधिकारी डॉ अमित पाल ने निर्माण कार्य की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई। मौके पर केवल 8 मजदूर पाए गए, जिस पर ठेकेदार के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

गौशाला निर्माण में देरी पर डीएम का कड़ा रुख
Kaushambi: जिले में निर्माण कार्यों की जमीनी हकीकत परखने के लिए जिलाधिकारी डॉ अमित पाल ने नगर पालिका परिषद मंझनपुर के वार्ड नंबर-17 में निर्माणाधीन कान्हा गौशाला का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान निर्माण कार्य की धीमी प्रगति सामने आने पर जिलाधिकारी ने गहरी नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए।
निरीक्षण के समय जिलाधिकारी को मौके पर केवल 08 मजदूर कार्य करते हुए मिले, जबकि परियोजना का आकार और समय-सीमा कहीं अधिक संसाधनों की मांग करती है। निर्माण कार्य लम्बित पाए जाने पर जिलाधिकारी ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए अधिशासी अधिकारी को ठेकेदार के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जिलाधिकारी डॉ अमित पाल ने निर्देशित किया कि श्रमिकों की संख्या बढ़ाकर और गुणवत्ता से कोई समझौता किए बिना माह अप्रैल 2026 तक निर्माण कार्य हर हाल में पूर्ण कराया जाए। उन्होंने कहा कि कान्हा गौशाला जैसी परियोजनाएं केवल भवन निर्माण नहीं, बल्कि गोवंश संरक्षण और जनहित से जुड़ी महत्वपूर्ण योजनाएं हैं, जिनमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं है।
निरीक्षण में खुली लापरवाही की पोल
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने अधिशासी अधिकारी प्रतिभा सिंह से परियोजना की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने बताया कि निर्माणाधीन कान्हा गौशाला की कुल लागत लगभग 1.65 करोड़ रुपये है। इस गौशाला की क्षमता 500 गोवंशों की होगी। परियोजना के अंतर्गत दो शेड, चारागोदाम सहित अन्य आवश्यक संरचनाओं का निर्माण कराया जा रहा है।
मंझनपुर में चल रहे निर्माण को लेकर प्रशासन सक्रिय
अधिशासी अधिकारी ने यह भी बताया कि कान्हा गौशाला तक पहुंचने के लिए एप्रोच मार्ग का निर्माण कार्य राज्य वित्त से कराया जाएगा, जिससे गौशाला तक आवागमन सुगम हो सके। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि एप्रोच रोड के निर्माण में भी समन्वय बनाकर समयबद्ध कार्य सुनिश्चित किया जाए।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने यह संदेश भी दिया कि जनपद प्रशासन गोवंश संरक्षण को लेकर पूरी तरह गंभीर है। कान्हा गौशाला जैसी योजनाएं निराश्रित गोवंशों के संरक्षण, देखभाल और पुनर्वास की दिशा में अहम भूमिका निभाती हैं। ऐसे में कार्य में लापरवाही न केवल प्रशासनिक अनुशासनहीनता है, बल्कि शासन की मंशा के भी विपरीत है।
अंत में जिलाधिकारी ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगली समीक्षा में यदि प्रगति संतोषजनक नहीं पाई गई तो जिम्मेदारों के विरुद्ध और कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कार्यस्थल पर नियमित निगरानी और रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।