‘साहब! जान बचाइए, मैं तो गार्ड हूँ…’ दस हजार की सैलरी, 3 करोड़ को टैक्स नोटिस, हार्ट अटैक आते-आते बचा कर्मचारी

कानपुर के नौबस्ता में 10 हजार पाने वाले सुरक्षा गार्ड को 3.14 करोड़ का जीएसटी नोटिस मिला। राशन कार्ड भी रद्द हुआ। पीड़ित एक साल से चक्कर काट रहा था। कमिश्नर के आदेश पर एफआईआर दर्ज।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 19 August 2026, 1:06 PM IST

Kanpur: उत्तर प्रदेश के कानपुर में अजीबो-गरीब प्रशासनिक लापरवाही और फर्जीवाड़े का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ महज 10 हजार रुपये महीना कमाने वाले एक साधारण सुरक्षा गार्ड को जीएसटी विभाग की तरफ से 3.14 करोड़ रुपये का भारी-भरकम टैक्स नोटिस थमा दिया गया। पीड़ित शख्स पिछले एक साल से न्याय के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा था, लेकिन हर बार उसकी गुहार अनसुनी कर दी गई। आखिरकार पुलिस कमिश्नर के हस्तक्षेप के बाद इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा मामला कानपुर के नौबस्ता थाना क्षेत्र का है। यहाँ के एक स्थानीय कोचिंग संस्थान 'ओम जी शुक्ला कोचिंग संस्थान' में पीड़ित व्यक्ति सुरक्षा गार्ड की नौकरी करता है। उसकी मासिक आय मात्र 10,000 रुपये है, जिससे वह किसी तरह अपने परिवार का गुजारा चलाता है। कुछ समय पहले उसके पास अचानक जीएसटी विभाग का एक नोटिस आया, जिसमें उसे 3.14 करोड़ रुपये का टैक्स चुकाने के लिए कहा गया। इतनी बड़ी रकम का नोटिस देखकर गार्ड के होश उड़ गए, क्योंकि उसने अपने पूरे जीवन में कभी इतने रुपयों की कल्पना तक नहीं की थी।

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राशन कार्ड भी हुआ निरस्त

परेशानियों का सिलसिला यहीं नहीं थमा। जीएसटी विभाग द्वारा उसे भारी-भरकम टैक्सपेयर (करदाता) के रूप में दर्शाए जाने के कारण, उसका राशन कार्ड भी सिस्टम द्वारा निरस्त कर दिया गया। एक तरफ जहां उसके पास दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा हो गया, वहीं दूसरी तरफ उसे करोड़ों रुपये के टैक्स की देनदारी का दबाव झेलना पड़ा। पीड़ित ने जब राशन कार्ड और जीएसटी के संबंध में जानकारी जुटाई, तो उसे पता चला कि उसके नाम पर किसी ने फर्जी तरीके से कोई कारोबार या गतिविधि रजिस्टर्ड करवा ली है।

दफ्तरों के चक्कर और निराशा

तथ्यों की इस विसंगति को सुधारने के लिए पीड़ित शख्स पिछले एक साल से लगातार अलग-अलग विभागों के चक्कर काट रहा था। वह कभी जीएसटी कार्यालय तो कभी अन्य प्रशासनिक दफ्तरों की सीढ़ियाँ चढ़ता रहा, लेकिन हर जगह उसे केवल निराशा हाथ लगी। आरोप है कि अधिकारियों ने इस गंभीर मामले की गहराई से जाँच करने के बजाय इसे 'केंद्र सरकार का मामला' कहकर टाल दिया और अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। पीड़ित मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुका था।

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पुलिस कमिश्नर की एंट्री और एफआईआर के आदेश

जब चारों तरफ से दरवाजे बंद हो गए, तब पीड़ित ने कानपुर के पुलिस कमिश्नर से मुलाकात कर अपनी आपबीती सुनाई। कमिश्नर ने मामले की गंभीरता को तुरंत भाँप लिया और इसे साधारण गलती न मानकर एक बड़े फर्जीवाड़े के रूप में लिया। पुलिस कमिश्नर ने तत्काल प्रभाव से नौबस्ता थाने को इस मामले में एफआईआर दर्ज करने और गहनता से जाँच करने के आदेश दिए। इस कार्रवाई के बाद अब पीड़ित को उम्मीद जगी है कि उसे इस फर्जी जालसाजी से मुक्ति मिलेगी और असली दोषियों का पर्दाफाश हो सकेगा।

Location :  Kanpur

Published :  19 August 2026, 1:06 PM IST