खाकी पर दाग या सिस्टम पर सवाल? कासगंज वसूलीकांड में तीन पुलिस अधिकारियों की तलाश तेज, जानें क्या कांड करके हुए फरार

कासगंज के पटियाली थाना क्षेत्र में सराफा व्यापारी से कथित अवैध वसूली का मामला अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। जांच में दो इंस्पेक्टर और एक पूर्व SOG प्रभारी के नाम सामने आने के बाद तीनों अधिकारी जिले से फरार बताए जा रहे हैं। डीजीपी के सख्त निर्देशों के बाद अब पूरे मामले में पुलिस पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 20 March 2026, 2:32 PM IST

Kasganj: कासगंज जिले के पटियाली थाना क्षेत्र में सराफा व्यापारी से कथित अवैध वसूली का मामला अब ऐसा रूप ले चुका है, जिसने पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है। मामला सिर्फ एक शिकायत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब जांच की सुई सीधे पुलिस अधिकारियों तक पहुंच गई है। आरोप है कि एक सराफा व्यापारी को दुकान से उठाकर थाने ले जाया गया, वहां उससे नकदी और जेवरात लिए गए, फिर भी उसे नहीं छोड़ा गया। बाद में परिजनों से और रकम मंगवाने के बाद ही उसे रिहा किया गया। अब जांच में दो इंस्पेक्टर और एक पूर्व SOG प्रभारी के नाम सामने आने के बाद तीनों के जिले से फरार होने की बात सामने आई है। इससे पूरे प्रकरण ने और गंभीर मोड़ ले लिया है।

व्यापारी का आरोप, थाने में ले जाकर वसूले गए रुपये और जेवर

यह मामला 20 जुलाई 2025 का बताया जा रहा है। सहावर निवासी सराफा व्यापारी अजय कुमार वर्मा ने आरोप लगाया कि उन्हें उनकी दुकान से उठाकर थाने लाया गया। वहां उनसे 50 हजार रुपये और सोना-चांदी लिया गया। आरोप यह भी है कि इसके बाद भी उन्हें छोड़ा नहीं गया और परिजनों से उधार लेकर करीब तीन लाख रुपये और मंगवाए गए। रकम मिलने के बाद ही व्यापारी को छोड़ा गया। पीड़ित की शिकायत जब उच्च अधिकारियों तक पहुंची तो मामला खुला और एसपी के निर्देश पर पटियाली थाने में सिपाहियों, एक भाजपा नेता और अज्ञात कोतवाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। हालांकि शुरुआती एफआईआर में थाना प्रभारी, SOG प्रभारी और सर्विलांस प्रभारी के नाम शामिल न होने से जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठे।

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डीजीपी की सख्ती के बाद बढ़ी हलचल, अब गिरफ्तारी का दबाव

बाद में उच्चस्तरीय निर्देशों पर दोबारा जांच हुई तो दो इंस्पेक्टर और पूर्व SOG प्रभारी के नाम भी सामने आ गए। गोपनीय जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद चार पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया था। इनमें से दो सिपाही जेल भी भेजे गए, हालांकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई। दूसरी तरफ पीड़ित ने आरोप लगाया कि जिन अधिकारियों पर सवाल हैं, उन्हें जिले से बाहर भेजने के बजाय स्थानीय थानों में ही तैनात किया गया, जिससे परिवार दहशत में है।

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मुकदमा वापस लेने के लिए दबाव और धमकी के आरोपों ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। अब डीजीपी की सख्ती के बाद जांच तेज है और तीनों अधिकारियों के फरार होने की खबर ने पुलिस पर बरामदगी और गिरफ्तारी का दबाव और बढ़ा दिया है। फिलहाल यह मामला जिले में खाकी की साख और सिस्टम की जवाबदेही, दोनों पर बड़ा सवाल बनकर खड़ा है।

Location : 
  • Kasganj

Published : 
  • 20 March 2026, 2:32 PM IST