8 साल बाद मिला इंसाफ! गैर इरादतन हत्या के दोषी को कोर्ट ने सुनाई सजा, आखिर क्या है पूरा मामला?

गोरखपुर में आठ साल पुराने गैर इरादतन हत्या के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद आरोपी को दोषी मानते हुए कठोर सजा और जुर्माना लगाया गया।

Gorakhpur: गोरखपुर में वर्ष 2018 में दर्ज गैर इरादतन हत्या के एक मामले में अदालत ने अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी को 8 वर्ष 10 माह के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोषी पर 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।  गोरखपुर पुलिस ने इसे उत्तर प्रदेश पुलिस के "ऑपरेशन कनविक्शन" अभियान की एक महत्वपूर्ण सफलता बताया है।

2018 में दर्ज हुआ था मुकदमा

यह मामला थाना पिपराइच में वर्ष 2018 में दर्ज मुकदमा संख्या 07/2018 से जुड़ा है। पुलिस ने घटना के बाद भारतीय दंड संहिता की धारा 304(1) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। विवेचना पूरी होने के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया और मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने साक्ष्य, दस्तावेज और गवाहों के बयान अदालत के सामने पेश किए। इन्हीं आधारों पर अदालत ने पूरे मामले का परीक्षण किया।

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सभी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी दोषी करार

मामले की सुनवाई एफटीसी-1 (फास्ट ट्रैक कोर्ट-1), गोरखपुर में हुई। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों की गवाही का परीक्षण करने के बाद प्रेमचन्द्र केवट पुत्र मन्नी केवट, निवासी गौजर रजही टोला, थाना हाटा, जनपद कुशीनगर को दोषी ठहराया। इसके बाद न्यायालय ने आरोपी को 8 वर्ष 10 माह के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया।

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इस मुकदमे में अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी नितिन मिश्रा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस और अभियोजन के समन्वय से अदालत के सामने मजबूत साक्ष्य पेश किए गए, जिससे मामले की कड़ियां स्पष्ट हुईं।

Location :  Gorakhpur

Published :  29 July 2026, 7:17 PM IST

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