गोरखपुर में पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत अनुदेशकों के लंबे संघर्ष को आखिरकार न्याय मिल गया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उत्तर प्रदेश के अनुदेशकों में खुशी की लहर दौड़ गई है। अनुदेशकों ने कोर्ट के इस फैसले की सराहना की।

अनुदेशकों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की सराहना की
Gorakhpur: पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत अनुदेशकों के लंबे संघर्ष को आखिरकार न्याय मिल गया है। सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद उत्तर प्रदेश के अनुदेशकों में खुशी की लहर दौड़ गई है। इसी क्रम में पूर्व माध्यमिक से कल्याण समिति उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष राकेश पटेल के गोरखपुर प्रथम आगमन पर गोरखपुर प्रेस क्लब सभागार में भव्य स्वागत समारोह का आयोजन किया गया।
जिला अध्यक्ष विनोद कुमार के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष का माल्यार्पण कर मिठाई खिलाई गई और फैसले की खुशी साझा की गई।
मीडिया से बातचीत करते हुए प्रदेश अध्यक्ष राकेश पटेल ने कहा कि वर्ष 2013 से पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में विषय विशेषज्ञ के रूप में सेवाएं दे रहे अनुदेशकों के लिए सुप्रीम कोर्ट का निर्णय ऐतिहासिक, न्यायपूर्ण और संघर्ष की जीत है।
उन्होंने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश देते हुए 1 अप्रैल 2026 से अनुदेशकों को ₹17,000 मासिक मानदेय देने का आदेश पारित किया है। यह फैसला उन हजारों अनुदेशकों के धैर्य, एकजुटता और वर्षों की कानूनी लड़ाई का परिणाम है, जिन्होंने कभी हार नहीं मानी।
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प्रदेश उपाध्यक्ष बालमुकुंद निषाद ने कहा कि यह निर्णय अनुदेशकों के भविष्य को सुरक्षित करने वाला मील का पत्थर है। सीमित संसाधनों और कम मानदेय के बावजूद अनुदेशक पूरी निष्ठा से बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने में जुटे रहे। सरकार के लंबे समय तक चले उपेक्षापूर्ण रवैये के कारण अनुदेशक मानसिक और आर्थिक दबाव में थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने उनके आत्मसम्मान को नई ताकत दी है।
जिला अध्यक्ष विनोद कुमार ने कहा कि यह आदेश वास्तव में “सुप्रीम” साबित हुआ है। इससे न केवल आर्थिक राहत मिली है, बल्कि अनुदेशकों के योगदान को भी संवैधानिक मान्यता मिली है। उन्होंने कहा कि अनुदेशक समाज इस ऐतिहासिक फैसले के लिए सुप्रीम कोर्ट का हृदय से आभार व्यक्त करता है।
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कार्यक्रम में जिला संगठन मंत्री नितिन सिंह, कोषाध्यक्ष बृजेश कुमार यादव, भारत भूषण यादव, सुनील कुमार पासवान, बृजेश कुमार, नरपति विश्वकर्मा, परवीन, मुन्नालाल, जितेंद्र कुमार, नितेश, निलेश, देवेंद्र राम, सकल पासवान, दिनेश पासवान सहित सैकड़ों की संख्या में अनुदेशक उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में फैसले का स्वागत करते हुए इसे अनुदेशक आंदोलन की ऐतिहासिक जीत करार दिया।