
कुआनो नदी पर छाई जलकुंभी (Img: Dynamite News)
Gorakhpur: सिकरीगंज से लेकर बनकटी तक दर्जनों गांवों के लिए जीवनदायिनी मानी जाने वाली कुआनो नदी इन दिनों बदहाली की शिकार है। नदी में जगह-जगह जलकुंभी की इतनी अधिक भरमार हो गई है कि पानी का बड़ा हिस्सा दिखाई तक नहीं दे रहा है।
हरी जलकुंभी की मोटी चादर ने नदी को पूरी तरह अपनी गिरफ्त में ले लिया है। हालात यह हैं कि नदी का जलप्रवाह प्रभावित होने के साथ ही जलीय जीवों के अस्तित्व पर भी संकट गहराने लगा है।
बेलघाट क्षेत्र से होकर गुजरने वाली कुआनो नदी का हाल बरसात के बाद और खराब हो गया है। नदी के कई हिस्सों में जलकुंभी जमा होकर लगातार फैल रही है। इससे पानी की सतह ढक गई है और नदी का प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित हो रहा है। जलकुंभी के घने फैलाव के बीच पानी में ऑक्सीजन की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका है, जिससे मछलियों और अन्य जलीय जीवों के लिए खतरा बढ़ गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी की यही स्थिति बनी रही तो जलीय जीवन पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है।
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जलकुंभी ने मछुआरों की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं। नदी में नाव चलाना और जाल डालकर मछली पकड़ना कठिन हो गया है। कई स्थानों पर जाल जलकुंभी में फंस जाते हैं, जिससे मछुआरों का काम प्रभावित हो रहा है। नदी किनारे रहने वाले ग्रामीणों का कहना है कि जलकुंभी के सड़ने से दुर्गंध फैल रही है। इसके साथ ही मच्छरों का प्रकोप बढ़ने से लोगों की परेशानी और बढ़ गई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि नदी की लगातार बिगड़ती स्थिति की जानकारी होने के बावजूद संबंधित विभाग और प्रशासन की ओर से अब तक जलकुंभी हटाने के लिए प्रभावी अभियान नहीं चलाया गया है। बरसात के बाद जलकुंभी का फैलाव बढ़ता गया, लेकिन नदी की सफाई की ओर जिम्मेदार विभागों का ध्यान नहीं गया।
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स्थानीय ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि कुआनो नदी से जलकुंभी हटाने के साथ नियमित सफाई अभियान चलाया जाए, ताकि जलप्रवाह सामान्य हो सके और जलीय जीवों को बचाया जा सके। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते कदम नहीं उठाया गया तो जीवनदायिनी कुआनो नदी धीरे-धीरे अपने अस्तित्व के संकट में पहुंच सकती है।
Location : Gorakhpur
Published : 15 September 2026, 4:53 PM IST