चाची की चिता की राख भी नहीं हुई ठंडी… घर लौटते वक्त बस से गिरा युवक, एक ही दिन में दो मौतों ने उजाड़ दिया परिवार

गोरखपुर के खजनी क्षेत्र में चाची के अंतिम संस्कार से लौट रहे धर्मेंद्र कुमार की चलती बस से गिरकर मौत हो गई। तेज ब्रेक लगने से उनका संतुलन बिगड़ गया था। एक ही दिन में परिवार ने दो अपनों को खो दिया। धर्मेंद्र अपने पीछे पत्नी और तीन मासूम बच्चों को छोड़ गए हैं।

गोरखपुर/खजनी। कहते हैं कि दुख कभी अकेला नहीं आता, और खजनी थाना क्षेत्र के सतुआभार गांव में मंगलवार रात घटी घटना ने इस कहावत को सच साबित कर दिया। परिवार अभी चाची के निधन के गम से उबर भी नहीं पाया था कि घर लौटते समय एक और हादसे ने पूरे परिवार की खुशियां छीन लीं। चाची के अंतिम संस्कार से लौट रहे धर्मेंद्र कुमार की चलती बस से गिरने के कारण मौत हो गई। इस दर्दनाक हादसे से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।

बड़हलगंज से लौटते समय बिगड़ा संतुलन

जानकारी के अनुसार, सतुआभार गांव निवासी धर्मेंद्र कुमार, पुत्र जित्तू प्रसाद, अपने परिजनों और ग्रामीणों के साथ चाची के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए बड़हलगंज मुक्तिधाम गए थे। देर रात सभी लोग बस से गांव लौट रहे थे। बताया जा रहा है कि धर्मेंद्र बस के गेट के पास खड़े थे। गौरा बाजार के पास अचानक चालक द्वारा तेज ब्रेक लगाने पर उनका संतुलन बिगड़ गया और वह चलती बस से सड़क पर गिर पड़े।

अस्पताल पहुंचने से पहले ही टूट गई जिंदगी की डोर

हादसे के बाद बस में सवार लोगों में अफरा-तफरी मच गई। परिजन और ग्रामीण तुरंत नीचे उतरे और गंभीर रूप से घायल धर्मेंद्र को अस्पताल पहुंचाया। हालांकि, चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही खजनी पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

एक ही दिन में दो मौतों से परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

धर्मेंद्र की मौत की खबर जैसे ही सतुआभार गांव पहुंची, पूरे गांव में मातम छा गया। जिस घर में कुछ घंटे पहले चाची के निधन का शोक था, उसी घर में जवान बेटे की मौत की खबर ने परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया। परिजनों की चीख-पुकार सुनकर गांव के लोग भी भावुक हो उठे। हर किसी की जुबान पर यही था कि नियति ने एक ही दिन में इस परिवार से दो बड़ी खुशियां छीन लीं।

पत्नी और तीन मासूम बच्चों के सिर से उठा पिता का साया

धर्मेंद्र अपने पीछे पत्नी और तीन छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं। अचानक हुए इस हादसे ने परिवार के सामने आर्थिक और सामाजिक दोनों तरह की चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। गांव के लोग शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधा रहे हैं, लेकिन इस अपूरणीय क्षति की भरपाई संभव नहीं है।

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चलती बस के गेट पर सफर करना कितना खतरनाक

यह हादसा एक बार फिर इस बात की चेतावनी देता है कि चलती बस के गेट पर खड़े होकर यात्रा करना जानलेवा साबित हो सकता है। एक पल की असावधानी ने एक परिवार का सहारा छीन लिया और चाची के अंतिम संस्कार से लौट रहा परिवार कुछ ही घंटों में एक और मातम में डूब गया।

Location :  Gorakhpur

Published :  15 July 2026, 9:27 AM IST

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