नए साल में माँ सरयू के पावन तट पर आयोजित सरयू महोत्सव में रचनात्मकता, आस्था और पर्यावरण चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस अवसर पर स्कूल के नन्हे कलाकारों ने रेत पर ऐसी अनुपम कलाकृति उकेरी, जिसने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।

बच्चों ने सेव अरावली’ का संदेश
Gorakhpur: नए साल में माँ सरयू के पावन तट पर आयोजित सरयू महोत्सव में रचनात्मकता, आस्था और पर्यावरण चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस अवसर पर एलपीएम पब्लिक स्कूल के नन्हे कलाकारों ने रेत पर ऐसी अनुपम कलाकृति उकेरी, जिसने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।
बच्चों ने “सेव अरावली” विषय को केंद्र में रखते हुए अरावली पर्वत श्रृंखला को भगवान गणेश के दिव्य स्वरूप में रेत पर साकार किया और पर्यावरण संरक्षण का सशक्त संदेश समाज तक पहुँचाया।
विद्यालय के विद्यार्थियों ने अपने अध्यापकों के मार्गदर्शन और सहयोग से घंटों की मेहनत के बाद इस अनोखी सैंड आर्ट को आकार दिया। कलाकृति में अरावली पर्वत श्रृंखला को गणपति के स्वरूप में दर्शाकर यह प्रतीकात्मक संदेश दिया गया कि जैसे भगवान गणेश विघ्नहर्ता हैं, वैसे ही अरावली पर्वत श्रृंखला प्रकृति के संतुलन की रक्षक है।
रेत पर उभरी यह कलाकृति न केवल सौंदर्य से भरपूर थी, बल्कि इसके पीछे छिपा पर्यावरणीय संदेश भी उतना ही गहन और प्रभावशाली था।
इस रचनात्मक प्रस्तुति का मुख्य उद्देश्य छात्रों में प्रकृति और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना तथा समाज को यह समझाना था कि अरावली पर्वत श्रृंखला केवल पहाड़ों का समूह नहीं, बल्कि जल संरक्षण, जलवायु संतुलन और जैव विविधता की अमूल्य धरोहर है।
बच्चों ने अपनी कला के माध्यम से यह संदेश दिया कि यदि अरावली सुरक्षित रहेगी, तभी पर्यावरण सुरक्षित रहेगा और भविष्य की पीढ़ियों का जीवन संरक्षित होगा।
सरयू महोत्सव में मौजूद दर्शकों, अभिभावकों और गणमान्य नागरिकों ने बच्चों की इस अनूठी पहल की खुले दिल से सराहना की। लोग रुक-रुककर कलाकृति को निहारते रहे और मोबाइल कैमरों में इस प्रेरणादायी दृश्य को कैद करते नजर आए।
विद्यालय प्रबंधन एवं आयोजन से जुड़े संरक्षकों—गिरधारीलाल स्वर्णकार, प्रबंधक भागीरथी प्रसाद स्वर्णकार, प्रबंध निदेशक अमरनाथ वर्मा, प्रधानाचार्य एकता वर्मा तथा रेवरेण्ट डी.के. सिंह—ने विद्यार्थियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस तरह की रचनात्मक गतिविधियाँ बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ समाज को भी सकारात्मक दिशा देती हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण जैसे गंभीर विषय को कला और आस्था से जोड़कर प्रस्तुत करना वास्तव में सराहनीय है।
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नववर्ष के प्रथम दिन सरयू तट पर सजी यह रेत कला न केवल महोत्सव का आकर्षण बनी, बल्कि एक प्रेरणादायी संदेश के रूप में यह याद दिला गई कि प्रकृति की रक्षा करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।