गोरखपुर: हत्या के प्रयास के दोषी को 7 साल की सजा, जानिए कैसे रची थी सनसनीखेज साजिश

गोरखपुर में हत्या के प्रयास के दोषी को अदालत ने 7 साल की सजा सुनाई। साथ ही उस पर 53 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। इस रिपोर्ट में जानिये आखिर कैसे रची गई थी साजिश

Updated : 12 June 2026, 8:40 PM IST

गोरखपुर: उत्तर प्रदेश पुलिस के "ऑपरेशन कनविक्शन" अभियान के तहत गोरखपुर पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। वर्ष 2020 में थाना बेलीपार क्षेत्र में दर्ज हत्या के प्रयास के मामले में न्यायालय ने अभियुक्त को दोषी करार देते हुए सात वर्ष के सश्रम कारावास तथा 53 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार थाना बेलीपार पर वर्ष 2020 में मु0अ0सं0 84/2020 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या का प्रयास) एवं 201 के अंतर्गत मुकदमा पंजीकृत किया गया था। मामले की विवेचना के दौरान पर्याप्त साक्ष्य जुटाए गए और आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। इसके बाद पुलिस द्वारा लगातार प्रभावी पैरवी की गई।

पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश द्वारा चलाए जा रहे "ऑपरेशन कनविक्शन" अभियान के क्रम में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गोरखपुर के निर्देशन में थाना बेलीपार के पैरोकार तथा मॉनिटरिंग सेल ने मामले की लगातार निगरानी की। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में सशक्त एवं तथ्यपरक साक्ष्य प्रस्तुत किए, जिसके आधार पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, गोरखपुर की अदालत ने अभियुक्त ओमप्रकाश कनौजिया पुत्र राम नरेश कनौजिया निवासी भौवापार, थाना बेलीपार को दोषी पाया।

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न्यायालय ने सुनवाई के उपरांत अभियुक्त को हत्या के प्रयास जैसे गंभीर अपराध का दोषी मानते हुए सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। साथ ही उस पर 53 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। न्यायालय के इस फैसले को अपराधियों के खिलाफ कड़ा संदेश माना जा रहा है।

गोरखपुर पुलिस अधिकारियों का कहना है कि "ऑपरेशन कनविक्शन" का उद्देश्य केवल अपराधियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें न्यायालय से दंडित कराकर पीड़ितों को न्याय दिलाना भी है। इसी लक्ष्य के तहत गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों की नियमित मॉनिटरिंग कर प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की जा रही है।

गोरखपुर: हत्या के प्रयास के दोषी को 7 साल की सजा, जानिए कैसे रची थी सनसनीखेज साजिश

इस मामले में अभियुक्त की दोषसिद्धि सुनिश्चित कराने में जिला शासकीय अधिवक्ता (डीजीसी) श्री प्रियानन्द सिंह तथा अपर जिला शासकीय अधिवक्ता (एडीजीसी) श्री जयनाथ यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनकी प्रभावी पैरवी और पुलिस टीम के समन्वित प्रयासों से न्यायालय से यह महत्वपूर्ण निर्णय प्राप्त हुआ।

Location :  Gorakhpur

Published :  12 June 2026, 8:17 PM IST