Farrukhabad: कोल्ड स्टोरेज में पड़े आलू का नहीं मिल रहा उचित मूल्य, किसानों की बढ़ी चिंता

फर्रुखाबाद में आलू किसानों की मुश्किलें थम नहीं रही हैं। कोल्ड स्टोरेज में रखे आलू का उचित मूल्य नहीं मिलने के बावजूद किसानों ने नई फसल की बुवाई शुरू कर दी है।

Updated : 14 October 2026, 11:47 AM IST
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Farrukhabad: उत्तर प्रदेश के प्रमुख कृषि बहुल क्षेत्रों में शुमार फर्रुखाबाद में आलू किसानों के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। एक तरफ जहां किसान पहले से कोल्ड स्टोरेज में डंप अपनी पुरानी फसल के उचित बाजार भाव न मिलने से आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उम्मीद का दामन थामे उन्होंने आगामी सीजन के लिए नई फसल की बुवाई का काम भी शुरू कर दिया है।

कोल्ड स्टोरेज में भरा है आलू, पर नहीं मिल रहा सही दाम

फर्रुखाबाद जनपद को देश और प्रदेश के प्रमुख आलू उत्पादक क्षेत्रों में विशेष स्थान प्राप्त है। यहां की आर्थिकी का एक बड़ा हिस्सा आलू की खेती और उसके कारोबार पर टिका हुआ है। किसानों ने पिछले सीजन में इस उम्मीद के साथ अपनी उपज को कोल्ड स्टोरेज में सुरक्षित भंडारित किया था कि वक्त आने पर उन्हें बेहतर दाम मिलेंगे।

लेकिन वर्तमान हालात इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रहे हैं। कोल्ड स्टोरेज में अभी भी आलू का पर्याप्त भंडार मौजूद है, मगर किसानों को उनकी इस उपज का अपेक्षित और उचित मूल्य बाजार में नहीं मिल पा रहा है।

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बढ़ती लागत और किराए ने बढ़ाई किसानों की चिंता

आलू के कम दाम मिलने का सीधा असर किसानों की आर्थिक सेहत पर पड़ रहा है। खेती से जुड़े खर्च लगातार बढ़ते जा रहे हैं। फसल की पैदावार तैयार करने में किसानों को खाद, बीज, सिंचाई और मजदूरों की मजदूरी के रूप में भारी भरकम राशि खर्च करनी पड़ती है।

इसके ऊपर से कोल्ड स्टोरेज का भारी किराया किसानों के लिए किसी अतिरिक्त बोझ से कम नहीं है। लागत और किराए के मुकाबले बाजार से कम रिटर्न मिलने के कारण अन्नदाताओं की चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं।

निराशा को पीछे छोड़, नई फसल की बुवाई में जुटे किसान

कृषि क्षेत्र की विडंबना देखिए कि पुरानी फसल का उचित मूल्य न मिल पाने की टीस और निराशा के बावजूद किसानों ने हिम्मत नहीं हारी है। बेहतर भविष्य और अच्छे मुनाफे की आस में उन्होंने एक बार फिर खेतों का रुख कर लिया है।

फर्रुखाबाद के किसान अब पूरी ऊर्जा के साथ नई आलू की फसल की बुवाई के कार्यों में जुट गए हैं। खेतों की जुताई से लेकर बीज रोपण तक का काम तेजी से चल रहा है, ताकि समय पर अगली फसल को तैयार किया जा सके।

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बाजार की चाल और मांग पर टिकी किसानों की नजरें

भले ही किसान नई फसल की बुवाई में व्यस्त हो चुके हैं, लेकिन उनके मन के किसी कोने में पुरानी फसल के उचित दाम न मिलने की कसक बरकरार है। अब किसानों की निगाहें पूरी तरह से बाजार की बदलती चाल और आने वाले दिनों में आलू की मांग पर टिकी हुई हैं।

Location :  Farrukhabad

Published :  14 October 2026, 11:47 AM IST

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