
मौलाना शम्सुल हुडा खान
Lucknow: सरकारी नौकरी, विदेशी नागरिकता और करोड़ों की संपत्तियां…इन सबके बीच अब प्रवर्तन निदेशालय की एंट्री हो गई है। ईडी लखनऊ ने 11 फरवरी 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत मौलाना शम्सुल हुडा खान और उनके सहयोगियों के खिलाफ संत कबीर नगर और आजमगढ़ में दो ठिकानों पर छापेमारी की। मामला गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी धन के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है।
क्या है आरोप?
जांच की शुरुआत यूपी पुलिस की तीन एफआईआर के आधार पर हुई। आरोप है कि मौलाना शम्सुल हुडा खान वर्ष 1984 में मदरसे में प्राथमिक शिक्षक नियुक्त हुए थे। साल 2013 में उन्होंने यूनाइटेड किंगडम की नागरिकता हासिल कर ली, लेकिन यह जानकारी छिपाई। ईडी के मुताबिक, विदेशी नागरिक बनने के बावजूद वे 2017 तक वेतन लेते रहे और 2023 तक पेंशन भी उठाते रहे। इतना ही नहीं, जांच में यह भी सामने आया है कि कथित तौर पर UK नागरिकता लेने के बाद भी उन्होंने 2017 के विधानसभा चुनाव में मतदान किया।
5 करोड़ से ज्यादा की बैंकिंग ट्रेल
ईडी का दावा है कि 2007 से 2025 के बीच मौलाना और उनके नियंत्रण वाले संस्थानों—रज़ा फाउंडेशन और कुलियातुल बनातिर रज़ाबिया एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी के खातों में 5 करोड़ रुपये से अधिक की रकम जमा हुई। यह लेनदेन सेंट्रल बैंक, पीएनबी, एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा, एचडीएफसी और इंडियन बैंक के खातों में हुआ। जांच एजेंसी यह भी देख रही है कि एनजीओ के जरिए आई रकम का इस्तेमाल मदरसों के निर्माण और संपत्ति खरीद में तो नहीं किया गया।
17 संपत्तियों के दस्तावेज जब्त
छापेमारी के दौरान 17 अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए हैं। इनका घोषित मूल्य करीब 3 करोड़ रुपये बताया गया है, जबकि बाजार कीमत लगभग 20 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। ईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या ये संपत्तियां कथित अवैध आय से खरीदी गईं।
परिवार भी जांच के दायरे में
मामले में मौलाना के साथ उनकी पत्नी, बेटे और बहू के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज है। ईडी के मुताबिक बेटा फिलहाल फरार है। एजेंसी बैंक खातों, संपत्ति के स्रोत और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की गहराई से जांच कर रही है। फिलहाल जांच जारी है और आगे की कार्रवाई दस्तावेजों और वित्तीय विश्लेषण के आधार पर तय होगी।
Location : Lucknow
Published : 12 February 2026, 5:56 AM IST