DN Exclusive: UGC के नए Equity Regulations 2026 पर क्यों मचा बवाल? समझिए पूरा मामला एक्सप्लेनर में

UGC के नए Equity Regulations 2026 ने कैंपस में बढ़ते भेदभाव, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और बढ़ती शिकायतों के बीच सख्त व्यवस्था लागू की है। ऐसे में अब इस नए कानून को लेकर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। UGC के नए Equity Regulations 2026 पर बवाल क्यों मचा हुआ है? समझिए पूरा मामला एक्सप्लेनर में

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 28 January 2026, 7:00 PM IST
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New Delhi: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है। ये नियम 13 जनवरी 2026 से लागू हो चुके हैं और भारत के हर कॉलेज व यूनिवर्सिटी के लिए अनिवार्य हैं। UGC का दावा है कि इनका मकसद कैंपस में जाति-आधारित भेदभाव खत्म करना और छात्रों के लिए सुरक्षित, समान माहौल बनाना है। लेकिन इन्हीं नियमों को लेकर कई वर्गों में विरोध भी देखने को मिल रहा है।

क्यों लाने पड़े UGC के नए नियम?

UGC के मुताबिक, कैंपस में भेदभाव की शिकायतें 2019–20 की 173 से बढ़कर 2023–24 में 378 हो गईं—करीब 118% की तेज़ बढ़ोतरी, जिसने नए नियम लाने की ज़रूरत पैदा की। रोहित वेमुला और पायल तड़वी जैसे मामलों ने दिखा दिया कि सिर्फ कागजी नियमों से छात्रों की सुरक्षा संभव नहीं है; सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद ही 2012 की नियमावली हटाकर 2026 के सख्त और अनिवार्य UGC नियम लागू किए गए।

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2012 के नियम क्यों फेल हो गए?

2012 में UGC ने पहली बार भेदभाव रोकने के लिए ढांचा बनाया था, लेकिन वह सलाहकारी था। संस्थानों पर नियम मानने की बाध्यता नहीं थी न दंड का प्रावधान था न समयसीमा तय थी OBC, EWS और दिव्यांग वर्ग का जिक्र तक नहीं था यही वजह रही कि कई शिकायतें महीनों दबाई जाती रहीं और नियम व्यवहार में कमजोर साबित हुए।

2026 के नए नियमों में क्या बदला?

2026 के नियम सलाह नहीं, कानून हैं। अब पालन न करने पर UGC के पास सख्त कार्रवाई की शक्ति है।

नए नियमों की मुख्य बातें

हर संस्थान में Equal Opportunity Centre (EOC) और Equity Committee का गठन अनिवार्य होगा। शिकायत मिलने पर 24 घंटे में बैठक, 15 दिन में जांच और 7 दिन के भीतर कार्रवाई जरूरी होगी। शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने पर फंडिंग रोकी जा सकती है, कोर्स की मान्यता रद्द हो सकती है और संस्थान की मान्यता तक खत्म की जा सकती है।

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क्या है UGC Equity Committee?

हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी में एक इक्विटी कमेटी गठित की जाएगी, जो भेदभाव से जुड़ी शिकायतों की जांच करेगी। इस कमेटी में SC, ST, OBC, अल्पसंख्यक, महिलाएं और दिव्यांग (PwD) वर्गों का प्रतिनिधित्व अनिवार्य होगा, जबकि इसकी सीधी जिम्मेदारी संस्थान के प्रमुख वाइस चांसलर या प्रिंसिपल पर होगी।

छात्रों को शिकायत कैसे करनी होगी?

यदि किसी छात्र या कर्मचारी को भेदभाव महसूस होता है, तो वे संस्थान की वेबसाइट पर उपलब्ध ऑनलाइन पोर्टल, Equal Opportunity Centre (EOC) में सीधे लिखित शिकायत, आधिकारिक ईमेल आईडी या 24×7 इक्विटी हेल्पलाइन के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

OBC को पहली बार शामिल करना

2012 के नियम SC-ST तक सीमित थे, लेकिन 2026 में OBC को पहली बार औपचारिक रूप से शामिल किया गया। इससे कुछ वर्गों में असंतोष है।

भेदभाव की परिभाषा बहुत व्यापक

अब भेदभाव में जाति, धर्म, लिंग, जन्मस्थान और दिव्यांगता सब शामिल हैं। विरोधियों का कहना है कि इससे नियमों का दुरुपयोग हो सकता है।

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झूठी शिकायत पर दंड क्यों हटाया गया?

2025 के ड्राफ्ट में झूठी शिकायत पर सजा का प्रावधान था, लेकिन अंतिम नियमों में इसे हटा दिया गया। UGC का तर्क है कि दंड का डर पीड़ितों को शिकायत से रोक सकता है। विरोधियों का कहना है कि इससे फर्जी आरोप बढ़ सकते हैं। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर #RollbackUGC ट्रेंड कर रहा है।

आगे क्या होने वाला है?

UGC Regulations 2026 को लेकर जारी विवाद के बीच अब शिक्षा मंत्रालय सामने आने की तैयारी में है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, मंत्रालय जल्द ही जनता के सामने नियमों से जुड़े सभी तथ्य स्पष्ट करेगा, ताकि गलतफहमियां दूर की जा सकें।

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2012 के नियम कमजोर थे, 2026 के नियम मजबूत हैं। लेकिन इन्हीं सख्त बदलावों ने एक नई राष्ट्रीय बहस को जन्म दे दिया है—क्या ये नियम सच में समानता लाएंगे या कैंपस में नए विवाद खड़े करेंगे? इसका जवाब आने वाला वक्त देगा।

 

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 28 January 2026, 7:00 PM IST

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