उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले में सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग के अंतर्गत लक्ष्मीपुर में स्थित ट्राम-वे रेल परियोजना (Tramway Project) भारत की पहली ट्राम-वे परियोजना है,जिसे 1924 में ब्रिटिश शासनकाल में स्थापित किया गया था।इस बंद हो चुके ट्रामवे रेल के इंजन को लक्ष्मीपुर डिपो में संरक्षित करके रखा गया था।

Maharajganj: उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले में सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग के अंतर्गत लक्ष्मीपुर में स्थित ट्राम-वे रेल परियोजना (Tramway Project) भारत की पहली ट्राम-वे परियोजना है,जिसे 1924 में ब्रिटिश शासनकाल में स्थापित किया गया था।इस बंद हो चुके ट्रामवे रेल के इंजन को लक्ष्मीपुर डिपो में संरक्षित करके रखा गया था। जिसे आज लखनऊ से रेलवे की टीम अपने साथ ले जाने के लिए आई थी। आज सुबह इंजन ट्रक पर लोड करने के लिए इंजन जैसे ही टीम तैयारी कर रही थी, इसकी भनक स्थानीय लोगों को हुई। जो तत्काल मौके पर पहुँच इसका विरोध करने लगे। स्थानीय लोगों का कहना है की ट्रामवे परियोजना का रेल इंजन लक्ष्मीपुर कस्बे की ऐतिहासिक धरोहर है, जिसे यही म्युजियम बनाकर संरक्षित किया जाए। लोगों के भारी विरोध के बाद फिलहाल अभी टीम इसे साथ नहीं ले जा सकी।
पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ से आई टीम के अधिकारी अरविंद सिंह ने बताया कि उच्चाधिकारियो के निर्देश पर उनकी टीम यहाँ इंजन को साथ ले जाने आई थी, जिसे यहाँ से लखनऊ चारबाग में संरक्षित किया जायेगा। स्थानीय लोगों चंद्र प्रकाश मिश्रा,गोल्डी सिंह, गणेश गुप्ता, दुर्गाशंकर,शौकत,दिनेश त्रिपाठी आदि लोगों ने कहा कि लक्ष्मीपुर कस्बे की ऐतिहासिक धरोहर है ट्रामवे रेल इंजन को यही म्युजियम बना संरक्षित किया जाए। ताकि इस कस्बे का विकास भी इससे जुड़ा है, अगर यहाँ म्युजियम बनेगा तो रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
मामले में SDO वन एस के सिंह ने बताया की उच्चाधिकारियों के निर्देश पर टीम आई थी, इसके लिए सबंधित विभाग से कई बार पत्राचार भी हुआ है। आज इंजन को ले जाते समय स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया है,जिसकी सूचना अधिकारियों को दे दिया गया है। यह परियोजना मुख्य रूप से कीमती वन संपदा को दुर्गम क्षेत्रों से लक्ष्मीपुर रेलवे स्टेशन तक पहुँचाने के लिए शुरू की गई थी। 1924 में स्थापित, यह 22.4 किमी लंबी रेल लाइन के साथ लक्ष्मीपुर रेंज और उत्तरी चौक रेंज को जोड़ती थी।
58 वर्षों तक सेवा देने के बाद, लगभग 8 लाख के घाटे के कारण 1982 में इसे बंद कर दिया गया था। वर्तमान में, इस विरासत स्थल (हेरिटेज) के संरक्षण के लिए काम किया जा रहा है और एकमा डिपो में इंजन, सैलून बोगी, और अन्य उपकरणों को पर्यटक आकर्षण के रूप में रखा गया है।
Maharajganj: उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले में सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग के अंतर्गत लक्ष्मीपुर में स्थित ट्राम-वे रेल परियोजना (Tramway Project) भारत की पहली ट्राम-वे परियोजना है,जिसे 1924 में ब्रिटिश शासनकाल में स्थापित किया गया था।इस बंद हो चुके ट्रामवे रेल के इंजन को लक्ष्मीपुर डिपो में संरक्षित करके रखा गया था। जिसे आज लखनऊ से रेलवे की टीम अपने साथ ले जाने के लिए आई थी। आज सुबह इंजन ट्रक पर लोड करने के लिए इंजन जैसे ही टीम तैयारी कर रही थी, इसकी भनक स्थानीय लोगों को हुई। जो तत्काल मौके पर पहुँच इसका विरोध करने लगे। स्थानीय लोगों का कहना है की ट्रामवे परियोजना का रेल इंजन लक्ष्मीपुर कस्बे की ऐतिहासिक धरोहर है, जिसे यही म्युजियम बनाकर संरक्षित किया जाए। लोगों के भारी विरोध के बाद फिलहाल अभी टीम इसे साथ नहीं ले जा सकी।
पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ से आई टीम के अधिकारी अरविंद सिंह ने बताया कि उच्चाधिकारियो के निर्देश पर उनकी टीम यहाँ इंजन को साथ ले जाने आई थी, जिसे यहाँ से लखनऊ चारबाग में संरक्षित किया जायेगा। स्थानीय लोगों चंद्र प्रकाश मिश्रा,गोल्डी सिंह, गणेश गुप्ता, दुर्गाशंकर,शौकत,दिनेश त्रिपाठी आदि लोगों ने कहा कि लक्ष्मीपुर कस्बे की ऐतिहासिक धरोहर है ट्रामवे रेल इंजन को यही म्युजियम बना संरक्षित किया जाए। ताकि इस कस्बे का विकास भी इससे जुड़ा है, अगर यहाँ म्युजियम बनेगा तो रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
मामले में SDO वन एस के सिंह ने बताया की उच्चाधिकारियों के निर्देश पर टीम आई थी, इसके लिए सबंधित विभाग से कई बार पत्राचार भी हुआ है। आज इंजन को ले जाते समय स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया है,जिसकी सूचना अधिकारियों को दे दिया गया है। यह परियोजना मुख्य रूप से कीमती वन संपदा को दुर्गम क्षेत्रों से लक्ष्मीपुर रेलवे स्टेशन तक पहुँचाने के लिए शुरू की गई थी। 1924 में स्थापित, यह 22.4 किमी लंबी रेल लाइन के साथ लक्ष्मीपुर रेंज और उत्तरी चौक रेंज को जोड़ती थी।
58 वर्षों तक सेवा देने के बाद, लगभग 8 लाख के घाटे के कारण 1982 में इसे बंद कर दिया गया था। वर्तमान में, इस विरासत स्थल (हेरिटेज) के संरक्षण के लिए काम किया जा रहा है और एकमा डिपो में इंजन, सैलून बोगी, और अन्य उपकरणों को पर्यटक आकर्षण के रूप में रखा गया है।