हिंदी
प्रतीकात्मक छवि (सोर्स- AI)
Deoria: उत्तर प्रदेश सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति और जिला प्रशासन के कड़े दावों को धता बताते हुए देवरिया के रुद्रपुर में एक बड़ा कारनामा सामने आया है। रुद्रपुर तहसील क्षेत्र के ग्राम नारायणपुर औराई में बाढ़ से सुरक्षा के नाम पर सरकारी खजाने को किस तरह चूना लगाया गया है, इसका जीवंत उदाहरण गोर्रा नदी के तट पर देखने को मिल रहा है। यहाँ बाढ़ से बचाव के लिए कराया गया करीब 500 मीटर का बोल्डर पिचिंग निर्माण कार्य मानसून की पहली ही बरसात और नदी के शुरुआती बहाव को भी नहीं झेल सका। करोड़ों रुपये की लागत से बना यह सुरक्षा कवच ताश के पत्तों की तरह ढह गया है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर बेहद गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थानीय ग्रामीणों में इस घटिया निर्माण को लेकर भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि जब गोर्रा नदी के तट पर बोल्डर पिचिंग का काम चल रहा था, तभी उन्होंने सामग्री और कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर आपत्तियाँ जताई थीं। घटिया निर्माण को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों से कई बार शिकायतें भी की गईं, लेकिन 'मलाई' काटने में मशगूल तंत्र ने ग्रामीणों की एक न सुनी। नतीजा आज सबके सामने है- जिस पिचिंग को सालों-साल ग्रामीणों की रक्षा करनी थी, उसने पहली ही बारिश में घुटने टेक दिए। कई जगहों से भारी-भरकम बोल्डर खिसक चुके हैं और पिचिंग पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि मानसून की तो यह सिर्फ शुरुआत है। यदि समय रहते इस क्षतिग्रस्त पिचिंग की युद्धस्तर पर मरम्मत नहीं कराई गई और तकनीकी खामियों को दूर नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में स्थिति भयावह हो सकती है। गोर्रा नदी का जलस्तर बढ़ने पर बाढ़ का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा, जिससे नारायणपुर औराई सहित आसपास के दर्जनों गांवों की भारी आबादी और सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि जलमग्न होने की कगार पर पहुंच जाएगी। ग्रामीणों का कहना है कि अगर अभी कदम नहीं उठाया गया तो क्षेत्र को तबाही से कोई नहीं बचा पाएगा।
इस महाघोटाले के सामने आने के बाद स्थानीय जनता ने अब आर-पार की लड़ाई का मूड बना लिया है। ग्रामीणों ने पूरे निर्माण कार्य की किसी उच्चस्तरीय और निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराने की मांग की है। लोगों का साफ कहना है कि सरकारी धन की इस तरह बंदरबांट और जनता के जीवन के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस भ्रष्टाचार में लिप्त संबंधित ठेकेदार और बाढ़ खंड विभाग के अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उन पर तत्काल कठोर दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए।
यह भी पढ़ें-Deoria Rainfall: मानसून की पहली बारिश और देवरिया में पानी-पानी, गर्मी के बीच दफ्तर लबालब
एक तरफ उत्तर प्रदेश सरकार का सख्त निर्देश है कि विकास कार्यों में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा, और इसी बात को देवरिया के जिलाधिकारी भी लगातार दोहराते रहते हैं। लेकिन धरातल पर सच्चाई इसके ठीक उलट है। बाढ़ खंड विभाग के जिम्मेदार अधिशासी अभियंता (XEN), जूनियर इंजीनियर (JE) और ठेकेदार मिलकर नियमों को ठेंगे पर रख रहे हैं। हैरानी की बात तो यह है कि क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि भी इस बोल्डर पिचिंग कार्य का दौरा कर चुके हैं, इसके बावजूद भ्रष्टाचार का यह खेल धड़ल्ले से चलता रहा।
अब देखना यह होगा कि पहली ही बरसात में खुली इस पोल के बाद जिला प्रशासन गहरी नींद से जागता है या नहीं? क्या 'मलाई' चाट रहे भ्रष्ट इंजीनियरों और ठेकेदार पर जिलाधिकारी देवरिया का चाबुक चलेगा, या फिर हर बार की तरह इस बार भी मामले को फाइलों में दबा दिया जाएगा? पूरे जिले की निगाहें अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।
Location : Deoria
Published : 12 July 2026, 12:10 PM IST
Topics : Bund Collapse Corruption In Construction Deoria District Administration Deoria News Gorra River