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मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल (Img: Google)
Varanasi: देश में कोडीन युक्त कफ सिरप के अवैध कारोबार का सबसे बड़ा मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल अभी भी पकड़ से दूर है। साधारण दिखने वाला यह दवा व्यापारी महज कुछ सालों में 800 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति का मालिक बन गया। प्रवर्तन निदेशालय और यूपी स्पेशल टास्क फोर्स की जांच में सामने आया है कि शुभम ने अपने पिता और करीबियों के साथ 173 फर्जी कंपनियों के जाल के जरिए बड़ी मात्रा में कफ सिरप खरीदकर उसे नेपाल और बांग्लादेश भेजा। हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क से कमाई को छिपाया।
इस सिंडिकेट का सबसे बड़ा मास्टरमाइंड खुद ही शुभम जायसवाल ही है। शुभम का सिंडिकेट उत्तर प्रदेश के वाराणसी, गाजियाबाद, जौनपुर और आजमगढ़ से लेकर झारखंड और पश्चिम बंगाल तक फैला हुआ था। इसके जरिए उन्होंने ट्रकों में भरकर कफ सिरप विदेश भेजा और नकली फर्मों के माध्यम से व्यापार का भ्रामक रिकार्ड रखा। जांच में अब तक 40 करोड़ रुपये से अधिक के हवाला ट्रेल का खुलासा हो चुका है। शुभम जायसवाल की पकड़ अभी तक नहीं हो सकी। दिल्ली और यूपी पुलिस की टीमें उसके दुबई में छिपे होने की खबरों पर नजर बनाए हुए हैं।
कोडीन कफ सिरप तस्करी केस में बड़ा एक्शन, शुभम जायसवाल की संपत्ति होगी जब्त
प्रवर्तन निदेशालय और यूपी स्पेशल टास्क फोर्स की जांच में जो खुलासे हुए हैं। वे किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं हैं। कोडीन युक्त कफ सिरप के अवैध कारोबार से करोड़ों कमाने के बाद शुभम जायसवाल सफेदपोश बनने की कोशिश कर रहा था। अक्सर दवा व्यापारियों की मीटिंग में संघ के बड़े पदाधिकारी मंच से उसका नाम लेकर स्वागत करते थे। शुभम की महत्वाकांक्षा केवल व्यापार या संघ में ऊंचा पद पाने तक सीमित नहीं थी। वह एमएलसी बनकर विधानसभा तक का रास्ता तय करना चाहता था।
शुभम जायसवाल वाराणसी की सप्तसागर मंडी का एक दवा व्यापारी है और अपनी फर्म शैली ट्रेडर्स के जरिए दवाइयों का कारोबार करता था। हालांकि जांच में पता चला कि यह फर्म महज एक मुखौटा थी। शुभम ने अपने पिता भोला प्रसाद और कुछ करीबी सहयोगियों के साथ मिलकर 173 फर्जी कंपनियां (Shell Companies) बनाई थीं। इन कंपनियों का इस्तेमाल कोडीन युक्त कफ सिरप की थोक खरीद और अवैध बिक्री के लिए किया जाता था।
शुभम जयसवाल की बड़ी मुश्किलें, ईडी जांच में मिला नया सुराग; पढ़ें पूरी खबर
ईडी की जांच में पता चला है कि शुभम ने हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल करके कमाई छिपाई। अवैध नकद को सोने में बदला गया और 50 से अधिक फर्जी बैंक खातों के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग की गई। अब तक 40 करोड़ रुपये से अधिक के हवाला ट्रेल का प्रमाण मिला है। कुल कारोबार 800 करोड़ से 2 हजार करोड़ रुपये के बीच है।
Location : Varanasi
Published : 8 January 2026, 3:11 PM IST