2021 में अधिवक्ता राजाराम वर्मा हत्याकांड की दोबारा विवेचना के दौरान पूर्व बार महामंत्री राकेश तिवारी को पूछताछ के लिए उठाए जाने पर नवाबगंज थाने में बवाल मच गया। सैकड़ों अधिवक्ताओं ने थाने का 10 घंटे तक घेराव किया, जिसके बाद देर रात तिवारी को छोड़ा गया।

कानपुर अधिवक्ता हत्याकांड की जांच में बवाल
Kanpur: नवाबगंज थाना क्षेत्र के गंगानगर हाउसिंग सोसाइटी में वर्ष 2021 में अधिवक्ता राजाराम वर्मा की गोली मारकर हत्या के मामले ने एक बार फिर शहर का माहौल गरमा दिया। बुधवार शाम जैसे ही पुलिस ने बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री राकेश तिवारी को पूछताछ के लिए उठाया, देखते ही देखते पूरा मामला हाई वोल्टेज ड्रामे में बदल गया।
एनआरआई सिटी से उठाए जाने पर भड़के अधिवक्ता
बुधवार शाम करीब 4:30 बजे पुलिस और स्पेशल टीम ने राकेश तिवारी को एनआरआई सिटी से हिरासत में लिया और पुलिस लाइन ले गई। इसकी जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में अधिवक्ता पुलिस लाइन पहुंचने लगे। हालात बिगड़ते देख पुलिस उच्चाधिकारियों के निर्देश पर तिवारी को नवाबगंज थाने लाया गया, लेकिन पीछे-पीछे सैकड़ों अधिवक्ता भी थाने पहुंच गए।
थाना बना रणक्षेत्र, 10 घंटे चला हंगामा
नवाबगंज थाने के अंदर और बाहर अधिवक्ताओं की भारी भीड़ जमा हो गई। नारेबाजी और हंगामे के चलते हालात तनावपूर्ण हो गए। स्थिति संभालने के लिए एक प्लाटून पीएसी के साथ काकादेव, स्वरूपनगर, कोहना, बेकनगंज, कर्नलगंज, ग्वालटोली, बजरिया, रावतपुर समेत करीब 10 थानों की फोर्स बुलानी पड़ी। पुलिस को दोनों ओर के रास्ते बंद कर ट्रैफिक डायवर्ट करना पड़ा।
पुलिस बोली- साक्ष्य रखें, दोषी होंगे तो कार्रवाई
करीब आठ बजे संयुक्त पुलिस आयुक्त अपराध विनोद कुमार सिंह मौके पर पहुंचे और अधिवक्ताओं को समझाने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि यह पूरी कार्रवाई विवेचना का हिस्सा है। पुलिस ने राकेश तिवारी से कहा कि जो साक्ष्य पुलिस के पास हैं, उनका काउंटर करें। अगर वे अपने पक्ष में साक्ष्य रखते हैं तो छोड़ा जाएगा, अन्यथा आगे की कार्रवाई होगी।
दोबारा विवेचना में आया नया नाम
जेसीपी विनोद कुमार सिंह के मुताबिक 2021 में हुए इस हत्याकांड में शूटर पहले ही जेल भेजे जा चुके हैं और आरोप पत्र दाखिल हो चुका था। पीड़ित के बेटे की असहमति के बाद दो-तीन महीने पहले दोबारा विवेचना शुरू हुई, जिसमें कुछ नए नाम सामने आए। इनमें एक नाम अधिवक्ता राकेश तिवारी का भी है, साथ ही दो कारोबारी भी जांच के दायरे में हैं। करीब 10 घंटे चले हंगामे के बाद देर रात 12 बजे राकेश तिवारी को मुचलके पर छोड़ दिया गया। इस दौरान भाजपा पार्षद दल के नेता नवीन पंडित और महापौर के बेटे अमित पांडेय उर्फ बंटी समेत कई राजनीतिक नेता भी थाने पहुंचे।