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Justice For Child (Img: Pinterest)
Prayagraj: जिला अदालत ने तीन वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और उसकी हत्या के मामले में दोषी गगन कुमार को फांसी की सजा सुनाई है। यह फैसला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट विनोद कुमार चौरसिया ने सुनाया। अदालत ने मामले को "दुर्लभतम से भी दुर्लभ" श्रेणी का अपराध मानते हुए कठोरतम दंड दिया।
अभियोजन के अनुसार, घटना 12 जून 2020 की शाम की है। पीड़िता के पिता ने हंडिया थाने में दर्ज कराई गई एफआईआर में आरोप लगाया था कि आरोपी गगन कुमार, जो रिश्ते में परिवार का सदस्य था, बच्ची को मिठाई दिलाने के बहाने अपने साथ ले गया। देर रात तक बच्ची के घर नहीं लौटने पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की।
कुछ देर बाद आरोपी के घर के पास सेम के पेड़ के नीचे बच्ची अचेत अवस्था में मिली। उसे अस्पताल ले जाने से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी।
मामले की सुनवाई के दौरान शासकीय अधिवक्ता विनय कुमार त्रिपाठी ने अदालत के समक्ष 13 गवाहों की गवाही, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, डीएनए रिपोर्ट और फोरेंसिक साक्ष्य पेश किए। अभियोजन ने दलील दी कि आरोपी ने पारिवारिक विश्वास का दुरुपयोग करते हुए जघन्य अपराध किया, इसलिए उसे कठोरतम सजा दी जानी चाहिए।
बचाव पक्ष ने साक्ष्यों को अपर्याप्त बताते हुए आरोपी के लिए कम सजा की मांग की। हालांकि बचाव पक्ष अदालत में अपने पक्ष में कोई गवाह पेश नहीं कर सका। उपलब्ध वैज्ञानिक और प्रत्यक्ष साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया।
अदालत ने दुष्कर्म और हत्या दोनों अपराधों में दोषी को फांसी की सजा सुनाई। इसके साथ ही 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिया कि पीड़िता के परिजनों को दो लाख रुपये का मुआवजा उपलब्ध कराया जाए।
पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक सहित 13 गवाहों की गवाही, डीएनए रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच इस मामले में निर्णायक साबित हुई। अदालत ने माना कि उपलब्ध साक्ष्यों ने आरोपी का अपराध संदेह से परे सिद्ध कर दिया।
Location : Prayagraj
Published : 30 June 2026, 10:00 AM IST