
प्रतीकात्मक छवि (सोर्स- Pinterest)
Bagpat: एक कहावत है कि जज भी भगवान का रूप होते हैं। इस खबर को पढ़ने के बाद आपको यह कहावत सच लगने लगेगी। करीब 27 साल तक कोर्ट के चक्कर काटने के बाद उत्तर प्रदेश के बागपत में एक अनोखा फैसला सामने आया है। 80 वर्षीय बुजुर्ग राजेंद्र सिंह को कोर्ट ने जेल भेजने के बजाय पूरे दिन कोर्ट रूम में खड़े रहने की प्रतीकात्मक सजा सुनाई। साथ ही उन पर एक हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। फैसला सुनाए जाने के बाद बुजुर्ग ने भगवान का शुक्रिया अदा किया और कहा कि इतने लंबे समय से चल रहा मुकदमा आखिरकार खत्म हो गया।
मामला 26 जून 1999 का है। सरूरपुर कलां गांव के रहने वाले धारा सिंह ने गांव के ही राजेंद्र सिंह और दो अन्य लोगों के खिलाफ गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस जांच के बाद चार्जशीट दाखिल हुई और राजेंद्र सिंह का मुकदमा अलग होकर लगातार अदालत में चलता रहा।
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इन 27 वर्षों के दौरान राजेंद्र सिंह को करीब 100 बार अदालत में पेश होना पड़ा। हाल के दिनों में बढ़ती उम्र और खराब स्वास्थ्य के कारण उनके लिए कोर्ट आना मुश्किल हो गया था। एक सुनवाई में कोर्ट में पेश नहीं होने पर उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। साथ में संपत्ति कुर्क करने का नोटिस भी भेजा गया था।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) मनिंद्रपाल सिंह की अदालत में सुनवाई के दौरान राजेंद्र सिंह ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। उन्होंने अपनी 80 वर्ष की उम्र और स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला देते हुए अदालत से नरमी बरतने की अपील की। अदालत ने उनकी स्थिति को देखते हुए उन्हें जेल भेजने के बजाय पूरे दिन कोर्ट रूम में खड़े रहने की सजा सुनाई और एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
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सजा पूरी करने के बाद राजेंद्र सिंह ने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ कोर्ट आना-जाना बेहद कठिन हो गया था। उन्होंने अदालत का आभार जताते हुए कहा कि इतने वर्षों से लंबित मामला समाप्त होना उनके और उनके परिवार के लिए बड़ी राहत है। इस फैसले के साथ करीब तीन दशक पुराना मुकदमा आखिरकार समाप्त हो गया।
Location : Bagpat
Published : 4 July 2026, 8:41 AM IST