ऑपरेशन कन्विक्शन का असर, अमेठी में आरोपी को कोर्ट ने सुनाई 7 साल की सजा

अमेठी के जगदीशपुर थाना क्षेत्र में नाबालिग को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने के मामले में सुल्तानपुर की विशेष अदालत ने आरोपी को 7 साल की सजा सुनाई है। पुलिस की मजबूत पैरवी और ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत यह बड़ी सफलता मानी जा रही है।

Post Published By: Nitin Parashar
Updated : 4 June 2026, 5:08 AM IST

Amethi : जिले में नाबालिग किशोरी को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने के सनसनीखेज मामले में आखिरकार अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी को दोषी करार दिया है। सुल्तानपुर की विशेष अदालत ने सुनवाई के बाद आरोपी को 7 साल के कठोर कारावास और 20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। इस फैसले को पुलिस की प्रभावी पैरवी और ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान की बड़ी सफलता माना जा रहा है।

2022 का है पूरा मामला

यह मामला वर्ष 2022 का है।  जब अमेठी जिले के जगदीशपुर थाना क्षेत्र में एक नाबालिग लड़की के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई गई थी। पीड़िता की मां ने 10 सितंबर 2022 को पुलिस को सूचना दी थी कि गांव का ही युवक जिग्नेश उसकी नाबालिग बेटी को बहला-फुसलाकर अपने साथ भगा ले गया है।

अपहरण, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज

शिकायत मिलते ही पुलिस ने गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। जिसमें अपहरण, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट की धाराएं शामिल थीं। जांच की जिम्मेदारी तत्कालीन विवेचक उपनिरीक्षक जितेंद्र कुमार को सौंपी गई थी। जांच के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर 20 नवंबर 2022 को चार्जशीट अदालत में दाखिल कर दी गई थी।

अमेठी में भाजपा का ना तो अपना विधायक और ना सांसद, 2027 के लिए अपनों का भरोसा भी दे रहा दगा

ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत तेज हुई पैरवी

उत्तर प्रदेश पुलिस के ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान के तहत इस केस को प्राथमिकता में रखा गया। पुलिस अधीक्षक अमेठी सरवणन टीके के निर्देश और अपर पुलिस अधीक्षक ज्ञानेन्द्र कुमार सिंह के पर्यवेक्षण में अभियोजन टीम ने कोर्ट में लगातार मजबूत पैरवी की। इसका असर यह रहा कि मामला तेजी से निपटा और आरोपी को सजा सुनाई गई।

अदालत का अहम फैसला

सुल्तानपुर की विशेष अदालत (एएसजे-12) ने आरोपी जिग्नेश को धारा 366 आईपीसी में 7 वर्ष कठोर कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड, धारा 363 आईपीसी में 3 वर्ष कारावास और 5 हजार रुपये अर्थदंड तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 8 में 3 वर्ष की सजा और 5 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।

हालांकि अदालत ने सबूतों के अभाव में आरोपी को दुष्कर्म (धारा 376 IPC) और पॉक्सो एक्ट की धारा 3/4 से दोषमुक्त कर दिया।

पुलिस की सख्ती से मिला इंसाफ

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के मामलों में तेजी से जांच और प्रभावी पैरवी के जरिए अपराधियों को सजा दिलाना ही मुख्य उद्देश्य है। यह फैसला ऐसे मामलों में कानून की सख्ती का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।

Location :  Amethi

Published :  4 June 2026, 4:29 AM IST