हाईकोर्ट का बड़ा फैसला! शादी-ब्याह का शोर अब नहीं तोड़ेगा सुकून… रात 10 बजे के बाद तेज आवाज पर लगेगी लगाम

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश में रात 10 बजे के बाद होने वाले तेज शोर पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने शादी और अन्य समारोहों में ध्वनि सीमा का पालन अनिवार्य किया है। साथ ही पार्कों के व्यावसायिक उपयोग पर भी पुनर्विचार करने और सरकारी सूची तैयार करने के आदेश दिए हैं।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 11 May 2026, 4:15 PM IST

Lucknow: उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण पर गंभीर रुख अपनाते हुए बड़ा आदेश जारी किया है। अदालत ने कहा है कि रात 10 बजे के बाद शादी, विवाह और अन्य सामाजिक समारोहों में तेज शोर किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने यह आदेश जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आम नागरिकों, बच्चों और बुजुर्गों को होने वाली असुविधा को देखते हुए यह कदम जरूरी है। अदालत ने राज्य सरकार, पुलिस, नगर निगम और एलडीए को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

मंडलों और जिलों को पार्कों का सर्वे करने का आदेश

कोर्ट ने प्रदेश के सभी 18 मंडलों के मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में पार्कों, खेल के मैदानों और खुली जगहों का विस्तृत सर्वे करें।

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इन स्थानों को उत्तर प्रदेश पार्क, खेल मैदान और खुली जगह संरक्षण एवं विनियमन अधिनियम 1975 के तहत सरकारी सूची में शामिल किया जाएगा। अदालत ने कहा कि इन जगहों का पूरा विवरण तैयार कर समय पर प्रस्तुत किया जाए ताकि उनका सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि इन सार्वजनिक स्थानों का उपयोग तय उद्देश्य के अलावा किसी अन्य गतिविधि के लिए नहीं किया जा सकता, जब तक कि इसके लिए सक्षम प्राधिकरण से अनुमति न ली जाए।

पार्कों के व्यावसायिक उपयोग पर जताई चिंता

हाईकोर्ट ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) को निर्देश दिया है कि वह जनेश्वर मिश्र पार्क सहित अन्य पार्कों और खुली जगहों के व्यावसायिक उपयोग पर पुनर्विचार करे। अदालत ने टिप्पणी की कि पार्कों में होने वाली व्यावसायिक और सामाजिक गतिविधियों से न केवल ध्वनि प्रदूषण बढ़ता है, बल्कि वहां रहने वाले पक्षियों और अन्य जीवों पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ता है।

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कोर्ट ने विशेष रूप से रिहायशी इलाकों और पार्कों में आयोजित होने वाले समारोहों में तय सीमा से अधिक शोर पर सख्त नियंत्रण लगाने को कहा है। साथ ही यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि पर्यावरण और सार्वजनिक शांति दोनों की सुरक्षा बनी रहे।

Location :  Lucknow

Published :  11 May 2026, 4:15 PM IST